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    दूषित पानी पीने से बिगड़ी 80 से ज्यादा ग्रामीणों की तबीयत, मचा हड़कंप

    रतलाम। पिपलोदा तहसील के आजमपुर डोडिया गांव में अचानक फैली रहस्यमय बीमारी ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है। लगभग 800 की आबादी वाले इस गांव में एक साथ दर्जनों ग्रामीणों को उल्टी, दस्त और पेट दर्द की गंभीर शिकायतें मिली हैं। प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गांव में अस्थाई मेडिकल कैंप स्थापित किया है, जहाँ 80 से अधिक मरीजों का उपचार किया गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 21 ग्रामीणों को, जिनमें 9 पुरुष और 12 महिलाएं शामिल हैं, पिपलोदा सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

    दूषित पेयजल का संकट और प्रशासन की कार्रवाई

    बीमारी का प्राथमिक कारण दूषित पेयजल को माना जा रहा है, क्योंकि लक्षण उसी कुएं का पानी पीने वालों में अधिक दिखे हैं, जिसका उपयोग ग्रामीण लंबे समय से करते आ रहे हैं। एहतियात के तौर पर प्रशासन ने संबंधित कुएं को सील कर दिया है और पीएचई विभाग द्वारा पानी के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं। ग्रामीणों को फिलहाल टैंकरों के माध्यम से सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है और कुएं में क्लोरीनेशन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीम बीमारी के सटीक कारणों की गहन पड़ताल कर रही है।

    नल-जल योजना के बावजूद कुएं पर निर्भरता

    गांव में दो सरकारी कुएं मौजूद होने के बावजूद ग्रामीण एक ही कुएं के मीठे पानी को प्राथमिकता देते हैं। ग्रामीणों का तर्क है कि सरकारी नल-जल योजना के तहत मिलने वाली जलापूर्ति न तो नियमित है और न ही उसका स्वाद संतोषजनक है। इस कारण वे वर्षों से अपनी प्यास बुझाने के लिए पारंपरिक कुएं पर ही आश्रित हैं। स्थानीय प्रशासन और पंचायत की ओर से यह भी जानकारी सामने आई है कि कुछ समय पहले ही कुएं की सफाई की गई थी, लेकिन पूरी तरह से सफाई के लिए पानी खाली करने की प्रक्रिया का ग्रामीण अक्सर विरोध करते रहे हैं।

    जांच रिपोर्ट और भविष्य की सावधानी

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों की टीम अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस सामूहिक बीमारी के पीछे कुएं का पानी है या अन्य कोई पर्यावरणीय कारक। जब तक प्रयोगशाला से पानी की रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक ग्रामीणों को उस कुएं का उपयोग न करने की सख्त हिदायत दी गई है। जिला प्रशासन ने यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि गांव में स्वच्छता और शुद्ध पेयजल की आपूर्ति में कोई कमी न रहे। फिलहाल सभी अस्पताल में भर्ती मरीजों की स्थिति पर निरंतर निगरानी रखी जा रही है और गांव में स्वास्थ्य जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है।

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