जयपुर। राजस्थान में ग्रामीण निकायों के लिए राजनीतिक रणनीतियों में जुटे अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण प्रशासनिक अपडेट सामने आया है। पंचायती राज संस्थाओं से जुड़ी आरक्षण लॉटरी प्रक्रिया के समय में बदलाव किया गया है। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग ने इस संबंध में नया विवरण साझा करते हुए स्पष्ट किया है कि स्थानीय प्रशासनिक स्तरों पर आरक्षण की कार्रवाई को आगे के शेड्यूल के अनुसार पूरा किया जाएगा।
आरक्षण प्रक्रिया के संशोधित चरण
पंचायती राज व्यवस्था के अंतर्गत जिला परिषद सदस्यों, पंचायत समिति सदस्यों तथा प्रधान पदों के लिए आरक्षित सीटों का निर्धारण अलग चरण में संपन्न होगा। इसके पश्चात निचले स्तर पर सरपंच और वार्ड पंच के पदों के लिए आरक्षण आवंटन की प्रशासनिक कार्रवाई पूरी की जाएगी। इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद ही ग्रामीण क्षेत्रों में राजनीतिक तस्वीर और संभावित उम्मीदवारों की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
समयसारिणी में संशोधन का कारण
स्थानीय चुनावों के संचालन के लिए तय व्यवस्था के अनुसार पहले चरण में शहरी निकायों और तत्पश्चात ग्रामीण निकायों की प्रक्रिया का संयोजन किया जाना है। समयावधि और न्यायिक दिशा-निर्देशों के अनुरूप संपूर्ण चुनावी प्रक्रिया को पूरा करने के उद्देश्य से आरक्षण आवंटन की तिथियों का पुननिर्धारण किया गया है। उच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत राज्य सरकार और संबंधित विभागों को निश्चित समयसीमा में स्थानीय निकायों से जुड़ी पूरी चुनावी प्रक्रिया पूरी करनी है।
प्रशासनिक अधिकारियों को आवश्यक निर्देश
विभाग के उच्चाधिकारियों ने सभी जिला कलेक्टर्स एवं उपखंड अधिकारियों को संशोधित व्यवस्था के अनुसार आरक्षण आवंटन सुनिश्चित करने के दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नगरीय निकायों के अध्यक्ष और जिला प्रमुख जैसे प्रमुख पदों के संदर्भ में शुरुआती प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद अब शेष पदों के आरक्षण पर ही सभी दावेदारों की निगाहें टिकी हुई हैं।


