नई दिल्ली: देशभर में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों पर अंकुश लगाने और जांच प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को सुनवाई करने जा रहा है। इस याचिका में अदालत से गुहार लगाई गई है कि पेपर लीक जैसे गंभीर अपराधों की जांच एक तय समयसीमा के भीतर पूरी की जाए और दोषियों के खिलाफ मामलों की त्वरित सुनवाई सुनिश्चित की जाए।
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और आलोक अराधे की पीठ करेगी सुनवाई
सर्वोच्च अदालत की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी सूचना के अनुसार, इस संवेदनशील मामले पर जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की खंडपीठ सुनवाई करेगी। अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत यह याचिका दाखिल की गई है। इसमें केंद्र और सभी राज्य सरकारों को पेपर लीक के मामलों से निपटने के लिए एक समान और मजबूत ढांचा तैयार करने के निर्देश देने की मांग की गई है।
दोषियों की संपत्ति जब्त करने और त्वरित मुकदमे की मांग
याचिकाकर्ता ने अदालत से यह भी अपील की है कि पेपर लीक में संलिप्त पाए जाने वाले अपराधियों और गिरोहों की चल-अचल संपत्तियों को कुर्क करने का आदेश दिया जाए। याचिका में दलील दी गई है कि बार-बार होने वाले पेपर लीक से लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटक जाता है और उनके परिवारों को भारी मानसिक व आर्थिक प्रताड़ना झेलनी पड़ती है। ऐसे अपराधों को रोकने में प्रशासनिक विफलता को छात्रों के मौलिक अधिकारों का सीधा हनन बताया गया है।
नीट पेपर लीक का हवाला देकर व्यवस्था सुधार की अपील
याचिका में हाल ही में संपन्न हुई नीट (NEET-UG) परीक्षा में हुए पेपर लीक प्रकरण का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि नीट जैसी बड़ी परीक्षा में हुई धांधली ने हमारी वर्तमान परीक्षा प्रणाली और सुरक्षा तंत्र की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है। लिहाजा, व्यवस्था में व्यापक सुधार और कठोर दंडात्मक कदम उठाना बेहद अनिवार्य हो गया है।


