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    लोकसभा में शांति बिल पेश, वीबी-जी राम जी बिल-2025 पर भी होगी चर्चा

    स्पीकर बोले- सदन बिलों पर लंबी चर्चा करेगा, जरूरत पड़ी तो रात चलेगी कार्यवाही

    नई दिल्ली। संसद के शीतकालीन सत्र का बुधवार को 13वां दिन है। सरकार ने लोकसभा में सस्टेनेबल हार्नेसिंग ऑफ एटॉमिक एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया बिल (शांति) पेश कर दिया है। इस पर चर्चा जारी है। वहीं विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी (वीबी-जी राम जी) बिल, 2025’ पर भी चर्चा होगी।
    कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा कि विपक्ष चाहता है कि इन बिलों को स्थायी समिति या संयुक्त संसदीय समिति में भेजा जाए। उन्होंने कहा कि बिल पर पर्याप्त समय देकर पूरी तरह चर्चा होनी चाहिए। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि सदन इन बिलों पर लंबी चर्चा करेगा और जरूरत पड़ने पर रात तक कार्यवाही जारी रहेगी। संसदीय मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि सरकार बिलों पर चर्चा के लिए समय देने को तैयार है और विपक्ष द्वारा मांगी गई विशेष चर्चा भी होगी। इससे पहले कांग्रेस संसदीय दल कार्यालय में कांग्रेस सांसद बैठक की, कांग्रेस ने अपने सांसदों को व्हिप जारी किया है। इसके बाद कांग्रेस सांसदों ने संसद के बाहर वीबी-जी राम जी बिल के खिलाफ प्रदर्शन भी किया।
    मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक लोकसभा में सस्टेनेबल हार्नेसिंग ऑफ एटॉमिक एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया बिल पर चर्चा शुरू हुई। परमाणु ऊर्जा राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बिल पर विचार करने के लिए प्रस्ताव रखा। डॉ. सिंह ने कहा कि यह बिल बहुत अहम और ऐतिहासिक है। भारत के परमाणु कार्यक्रम के जनक डॉ. होमी भाभा ने इसे शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए समर्पित किया था और अब इसे पीएम मोदी के नेतृत्व में साकार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमें जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करनी होगी और परमाणु ऊर्जा उत्पादन बढ़ाना होगा। उन्होंने यह भी बताया कि कुछ मामलों में परमाणु ऊर्जा नवीकरणीय ऊर्जा से बेहतर है, क्योंकि नवीकरणीय ऊर्जा 24 घंटे उपलब्ध नहीं हो सकती।
    लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बताया कि उन्हें कई स्थगन प्रस्ताव मिले थे, जिनमें सदन के कामकाज को रोककर कई मुद्दों पर चर्चा करने की मांग की गई थी। उन्होंने साफ कहा था कि इनमें से किसी भी प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया गया। सदन ने इसके बाद अपना नियमित काम जारी रखा और कई केंद्रीय मंत्रालयों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज, बयान और रिपोर्टें सदन के पटल पर रखी गईं।

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