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    सूखे को लेकर महाराष्ट्र में बढ़ी सियासी हलचल, MVA सांसद PM मोदी से रखेंगे किसानों की बात

    मुंबई। महाराष्ट्र में कम बारिश और सूखे की मार झेल रहे किसानों के मुद्दों को लेकर राज्य की सियासत गरमा गई है। विपक्षी दलों ने सरकार पर तत्काल सूखा घोषित करने का दबाव बढ़ा दिया है, वहीं महाविकास आघाड़ी (MVA) के सांसद इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करने की तैयारी कर रहे हैं।

    विजय वडेट्टीवार और बलवंत वानखड़े की मांग

    महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता विजय वडेट्टीवार ने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब पड़ोसी राज्य कर्नाटक सूखा घोषित कर चुका है, तो महाराष्ट्र सरकार किस बात का इंतजार कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा हमेशा महाराष्ट्र की अनदेखी की जाती है। उन्होंने चेतावनी दी कि गणेश विसर्जन के बाद कांग्रेस नेता राज्य के सभी जिलों का दौरा कर जमीनी हकीकत का जायजा लेंगे और बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे। वहीं, कांग्रेस नेता बलवंत वानखड़े ने कहा कि राज्य के कई हिस्सों में पिछले 45 दिनों से बारिश नहीं हुई है, जिससे फसलें सूख रही हैं और किसानों की आर्थिक स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है।

    प्रधानमंत्री से मिलेंगे MVA सांसद

    राज्य में सूखे जैसे हालात और किसानों की समस्याओं को लेकर MVA के सांसद जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। इस प्रतिनिधिमंडल द्वारा पीएम के सामने राज्य की वास्तविक स्थिति रखी जाएगी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि प्रधानमंत्री के सामने जमीनी तथ्य रखना पूरी तरह से उचित है। उन्होंने भरोसा जताया कि केंद्र सरकार इस गंभीर मसले पर बेहद सकारात्मक रुख अपनाएगी।

    शरद पवार की मुख्यमंत्री को चिट्ठी

    इससे पहले एनसीपी (शरदचंद्र पवार) प्रमुख शरद पवार ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर राज्य में तुरंत सूखा घोषित करने की मांग की थी। उनके अनुसार, राज्य के 36 में से 31 जिलों में सामान्य से 19 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे सोयाबीन, कपास और दलहन की फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।

    प्रमुख मांगें और राहत पैकेज

    शरद पवार ने सरकार से प्रभावित किसानों के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाने की मांग की है:

    • प्रभावित किसानों को 50,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की आर्थिक सहायता दी जाए।

    • खेतिहर मजदूर परिवारों को 25,000 रुपये प्रति परिवार की विशेष मदद मिले।

    • किसानों का कृषि कर्ज पूरी तरह माफ किया जाए और नया कर्ज उपलब्ध कराया जाए।

    • मनरेगा (MGNREGS) के तहत जल संरक्षण के कार्य शुरू किए जाएं और जरूरत वाले क्षेत्रों में पानी के टैंकर पहुंचाए जाएं।

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