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    पूर्व मंत्री की गिरफ्तारी पर गरमाई राजनीति, TVK का बड़ा बयान- ‘CM के पैरों पर गिरने से भी नहीं मिलेगी एंट्री’

    चेन्नई। द्रमुक (DMK) के पूर्व मंत्री अनीता राधाकृष्णन को मुख्यमंत्री विजय के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक और अमर्यादित टिप्पणी करने के मामले में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा उनकी अग्रिम जमानत याचिका को सिरे से खारिज किए जाने के ठीक बाद की गई। गिरफ्तारी के बाद राधाकृष्णन ने सत्तारूढ़ दल पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन पर लगातार द्रमुक छोड़ने, विधायक पद से इस्तीफा देने और सत्ताधारी पार्टी में शामिल होने का अनुचित राजनीतिक दबाव बनाया जा रहा था, जिसके लिए उन्हें भारी-भरकम रकम की पेशकश भी की गई थी। हालांकि, उन्होंने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया और साफ किया कि वे वैचारिक रूप से हमेशा द्रमुक के साथ ही खड़े रहेंगे।

    मुख्यमंत्री पर अमर्यादित टिप्पणी और गिरफ्तारी का नाटकीय घटनाक्रम

    अनीता आर. राधाकृष्णन को पुलिस ने उस समय हिरासत में लिया जब वे अपने निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत ऑथूर इलाके का दौरा कर रहे थे। राज्य के ऊर्जा संसाधन मंत्री निर्मल कुमार ने इस विधिक कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि पूर्व मंत्री को मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और उनके परिवार के विरुद्ध दिए गए विद्वेषपूर्ण भाषण के कारण कानून के दायरे में लिया गया है। गिरफ्तारी के दौरान कोर्ट ले जाते समय राधाकृष्णन के समर्थकों ने पुलिसिया कार्रवाई के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और विरोध प्रदर्शन किया। दूसरी तरफ, द्रमुक के शीर्ष नेतृत्व और पार्टी अध्यक्ष एम. के. स्टालिन ने इस त्वरित गिरफ्तारी की टाइमिंग पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। स्टालिन ने सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल एक गंभीर मामले में अपनी ही पार्टी के विधायक पर लगे गैंगरेप जैसे संगीन आरोपों पर चुप्पी साधे हुए है और विपक्षी नेताओं को निशाना बना रहा है।

    सत्तारूढ़ दल का पलटवार और पूर्व मंत्री पर गंभीर आरोप

    इधर, तमिलनाडु सरकार के मंत्री सी.टी.आर. निर्मल कुमार ने पूर्व मंत्री के दावों को सिरे से खारिज करते हुए उन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 'तमिलगा वेट्री कझगम' (TVK) में राधाकृष्णन जैसे दागी पृष्ठभूमि के लोगों के लिए कोई स्थान नहीं है और पार्टी उन्हें शामिल करने के लिए किसी भी तरह का दबाव नहीं बना रही थी। मंत्री ने कड़े शब्दों में कहा कि यदि राधाकृष्णन अपनी भूल का प्रायश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री के चरणों में भी गिर जाएं, तब भी उन्हें दल की सदस्यता कभी नहीं दी जाएगी। सरकार की ओर से आरोप लगाया गया कि द्रमुक नेता पिछले दो दशकों से दक्षिणी तमिलनाडु में जमीन हड़पने, अवैध समानांतर अदालतें (कंगारू कोर्ट) चलाने और क्षेत्र की कानून-व्यवस्था व शांति को भंग करने जैसी असामाजिक गतिविधियों में संलिप्त रहे हैं।

    राजनीतिक दलबदल के आरोपों पर गरमाई सूबे की सियासत

    इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी ने तमिलनाडु के राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह गरमा दिया है। एक ओर जहां विपक्षी खेमा इसे राजनीति से प्रेरित और आवाज दबाने की दमनकारी कार्रवाई बता रहा है, वहीं दूसरी ओर सत्ता पक्ष इसे कानून सम्मत और प्रशासनिक निष्पक्षता का उदाहरण करार दे रहा है। राधाकृष्णन द्वारा लगाए गए प्रलोभन और दलबदल के आरोपों ने दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच वैचारिक और सांगठनिक टकराव को और अधिक तीखा कर दिया है, जिसका व्यापक असर आने वाले दिनों में राज्य के राजनीतिक परिदृश्य पर दिखना तय माना जा रहा है।

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