विराटनगर में मुक्तिधारा संस्थान, DoCC और M3M Foundation के संयुक्त तत्वावधान में प्रोजेक्ट सक्षम के तहत तीन दिवसीय SHG ट्रेनिंग शुरू हुई। महिलाओं को स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की ट्रेनिंग दी जा रही है।
मिशनसच न्यूज, विराटनगर। महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मुक्तिधारा संस्थान, DoCC और M3M Foundation के संयुक्त तत्वावधान में प्रोजेक्ट सक्षम के अंतर्गत तीन दिवसीय स्वयं सहायता समूह (SHG) प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत पूरे उत्साह और जोश के साथ की गई।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को संगठित कर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना, स्वरोजगार के अवसर प्रदान करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सशक्त कदम उठाना है। कार्यक्रम के पहले दिन महिलाओं को देश के विभिन्न हिस्सों में स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से सफल हुई महिलाओं की प्रेरणादायक कहानियां वीडियो के माध्यम से दिखाई गईं। इन कहानियों के जरिए महिलाओं को यह समझाया गया कि किस प्रकार संगठित होकर और सामूहिक प्रयासों से आर्थिक समृद्धि हासिल की जा सकती है।
प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को “स्वयं की सहायता, स्वयं के द्वारा और स्वयं के लिए” की भावना को समझाया गया। महिलाओं ने यह जाना कि संगठित होकर कार्य करने से न केवल आर्थिक स्थिति मजबूत होती है, बल्कि आत्मविश्वास और सामाजिक सम्मान में भी वृद्धि होती है।
इस स्वतंत्र चर्चा सत्र में विराटनगर ग्राम में मुक्तिधारा संस्थान द्वारा संचालित सिलाई सेंटर में प्रशिक्षित 15 महिलाओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई। इन महिलाओं ने अनन्त कात्यायनी के मार्गदर्शन में विभिन्न आयामों पर चर्चा करते हुए आजीविका अर्जन के चार प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की और स्वरोजगार के संभावित विकल्पों की सूची तैयार की।
महिलाओं ने सिलाई, हस्तशिल्प, लघु उद्यम और घरेलू उत्पादन जैसे क्षेत्रों में स्वरोजगार की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया। इस प्रक्रिया ने महिलाओं को अपने कौशल और क्षमताओं को पहचानने और उन्हें आर्थिक गतिविधियों में बदलने के लिए प्रेरित किया।
प्रशिक्षण के आगामी दो दिनों में महिलाओं को स्वयं सहायता समूह (SHG) के गठन की पूरी प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाएगी। इसमें SHG की पात्रता, सदस्यता के लिए आवश्यक दस्तावेज, समूह का रजिस्ट्रेशन, बैंक खाता खोलने की प्रक्रिया और माइक्रोफाइनेंस के तहत कम ब्याज पर ऋण प्राप्त करने की प्रक्रिया शामिल है।
इसके अलावा महिलाओं को बचत की आदत विकसित करने, सामूहिक फंड बनाने, बुक कीपिंग और रिकॉर्ड्स को व्यवस्थित तरीके से बनाए रखने की ट्रेनिंग भी दी जाएगी। प्रशिक्षण में महिलाओं को उद्यम गतिविधियों के लिए वार्षिक कैलेंडर तैयार करने और मॉक बिजनेस प्लान बनाने का भी अभ्यास कराया जाएगा, जिससे वे भविष्य में सफल उद्यमी बन सकें।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम से महिलाओं में आत्मविश्वास और जागरूकता बढ़ी है। महिलाएं अब न केवल स्वरोजगार के अवसरों को समझ रही हैं, बल्कि अपने भविष्य को बेहतर बनाने के लिए ठोस कदम उठाने के लिए भी तैयार हो रही हैं।
प्रोजेक्ट सक्षम के तहत आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रहा है। इससे महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता मिलने के साथ-साथ समाज में उनकी भागीदारी और सम्मान भी बढ़ेगा।
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