भोपाल: मध्य प्रदेश में मूंग उपार्जन को लेकर उपजा किसान असंतोष आखिरकार सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच हुई वार्ता के बाद शांत हो गया है। प्रदेश के कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना ने जानकारी दी कि शासन 60 प्रतिशत तक मूंग की खरीदी करेगा। नर्मदापुरम, हरदा और सीहोर जैसे मूंग उत्पादक क्षेत्रों में औसतन 3 क्विंटल प्रति एकड़ के हिसाब से खरीदी की जाएगी। इसके अलावा, किसानों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए स्लॉट बुकिंग की तिथि 10 अगस्त और मूंग उपार्जन की अंतिम सीमा 20 अगस्त तक बढ़ा दी गई है। साथ ही खाद वितरण के लिए लागू की गई ई-टोकन प्रणाली को भी फिलहाल के लिए रोक दिया गया है।
सहमति के बाद आंदोलन समाप्त, यातायात बहाल
मंत्रालय में हुई सकारात्मक चर्चा के बाद किसान संगठनों ने आंदोलन वापस लेने का निर्णय लिया। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त शैलेंद्र सिंह चौहान ने पुष्टि की कि किसानों के साथ सहमति बन गई है। इसके पश्चात प्रशासन ने रोशनपुरा चौराहे से किसानों को बसों के माध्यम से उनके वाहनों तक पहुंचाया। प्रदर्शनकारियों के रवाना होने के बाद बाणगंगा मार्ग को छोड़कर शहर के अन्य प्रमुख रास्तों पर आवागमन पूर्णतः सामान्य कर दिया गया।
केंद्रीय मंत्री का पत्र और राजनीतिक हलचल
इस पूरे घटनाक्रम के बीच केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को एक पत्र भेजा। इसमें स्पष्ट किया गया कि पीएम-आशा योजना के तहत केंद्र सरकार 25 फीसदी तक खरीदी की अनुमति देती है, जबकि उससे अधिक की खरीदी राज्य सरकार अपने संसाधनों से कर सकती है। वहीं, सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने भी किसानों के इस विरोध प्रदर्शन का खुला समर्थन किया।
फैसले पर युवा किसानों में असंतोष
हालांकि, सरकार के इस निर्णय से कुछ युवा किसान पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आए। उनका तर्क है कि 3 क्विंटल प्रति एकड़ की सीमा बहुत कम है और राहत के लिए कम से कम 5 क्विंटल प्रति एकड़ की खरीदी होनी चाहिए। पुलिस अधिकारियों ने असंतुष्ट युवाओं को समझा-बुझाकर शांतिपूर्वक वापस भेजा।
सड़कों पर दिखा तीखा विरोध और प्रदर्शन
इससे पहले प्रदर्शनकारी किसानों ने भारी पुलिस सुरक्षा और चार स्तरीय बैरिकेडिंग को तोड़ते हुए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के निवास का घेराव किया था। इसके बाद जब किसानों ने मुख्यमंत्री आवास की ओर रुख किया, तो एमपी नगर में पुलिस के साथ जमकर धक्का-मुक्की हुई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए रोशनपुरा से लेकर सीएम हाउस तक डंपर, बसें और बैरिकेड्स लगाकर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। आंदोलन के दौरान कुछ किसानों ने अर्धनग्न होकर विरोध दर्ज कराया, तो वहीं कइयों ने सड़क पर ही दाल-बाटी बनाकर खाया। प्रदर्शन में सत्ताधारी दल के कुछ स्थानीय कार्यकर्ताओं ने भी सरकार को वादों की याद दिलाते हुए किसानों के हक की बात कही।


