लातेहार | झारखंड के प्रसिद्ध पलामू टाइगर रिजर्व (PTR) के कोर और बफर जोन में एक दिवसीय 'वाटरहोल गणना 2026' का महत्वपूर्ण अभियान सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। कड़कड़ाती धूप और भीषण गर्मी के इस दौर में जंगल के भीतर मौजूद सभी प्राकृतिक और कृत्रिम जलाशयों पर प्यास बुझाने आने वाले वन्यजीवों की सटीक मैपिंग के लिए इस विशेष गणना का आयोजन किया गया था। इस बड़े पैमाने पर चलाए गए अभियान की सबसे बड़ी विशेषता अग्रिम पंक्ति के समर्पित वन कर्मियों के साथ-साथ पर्यावरण और प्रकृति से प्रेम करने वाले स्वयंसेवकों की सक्रिय जनभागीदारी रही।
मचानों से लगातार 14 घंटे निगरानी, डेटा शीट में दर्ज हुआ वन्यजीवों का पूरा ब्योरा
वन्यजीवों को बिना किसी व्यवधान या परेशानी के उनके प्राकृतिक आवास में गिनने के लिए यह चुनौतीपूर्ण अभियान लगातार 14 घंटों तक चलाया गया। गणना में जुटी टीमों को जंगलों में बने ऊंचे वॉचटावर (मचानों) और छलावरण (कैमफ्लाज) तकनीकों की मदद से तैनात किया गया था, ताकि जानवर इंसानी मौजूदगी से डरे बिना पानी पीने आ सकें। प्रत्येक जलस्रोत पर मुस्तैद वन रक्षकों, ट्रैकर्स और वालंटियर्स को एक विशेष वैज्ञानिक डेटा शीट सौंपी गई थी। इस शीट में वन्यजीवों के जलाशय पर पहुंचने का समय, उनकी सटीक प्रजाति, नर, मादा और शावकों का वर्गीकरण तथा संबंधित जलस्रोत के पानी के स्तर की पूरी जानकारी दर्ज की गई है।
हाथी, तेंदुआ और भालू समेत कई दुर्लभ स्तनधारी जीवों की भारी सक्रियता दर्ज
इस विशेष वाटरहोल गणना की शुरुआती रिपोर्ट से बेहद उत्साहजनक और सकारात्मक संकेत मिले हैं। भीषण गर्मी के कारण पानी की तलाश में निकले कई महत्वपूर्ण और दुर्लभ स्तनधारी जीवों की रिजर्व में भारी मौजूदगी रिकॉर्ड की गई है। इस 14 घंटे के निगरानी चक्र के दौरान पलामू के जंगलों में गजराज (हाथी), तेंदुआ, गौर (भारतीय बाइसन), चीतल, सांभर, कोटरा (भैंस जैसी प्रजाति), भालू और सियार जैसे वन्यजीवों को पानी पीते हुए लाइव ट्रैक किया गया है, जो रिजर्व के समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) को दर्शाता है।
वैज्ञानिक डेटा से तय होगा वाटरहोल मैनेजमेंट, शिकार विरोधी तंत्र को मिलेगी मजबूती
पलामू टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर प्रजेश कांत जेना ने इस अभियान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस गणना से मिले आंकड़े वन्यजीवों की मौसमी आवाजाही और उनकी आबादी का एक सटीक व्यावहारिक अनुमान प्रदान करते हैं। एकत्रित की गई डेटा शीट के वैज्ञानिक विश्लेषण से पीटीआर प्रशासन को यह समझने में मदद मिलेगी कि तपती गर्मियों में जंगल के कौन से हिस्से और कौन से वाटरहोल्स वन्यजीवों के लिए सबसे ज्यादा मददगार साबित हो रहे हैं। इस निष्कर्ष के आधार पर भविष्य में कृत्रिम जल आपूर्ति, नए जलाशयों के निर्माण और शिकार विरोधी (एंटी-पोचिंग) नेटवर्क को और अधिक चाक-चौबंद किया जाएगा।


