चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने लीगल एड डिफेंस काउंसिल यानी एलएडीसी प्रणाली को लेकर चल रहे वकीलों के विरोध के माहौल के बीच इसके बेहद प्रभावी और पूरी तरह पारदर्शी संचालन को सुनिश्चित करने के वास्ते विस्तृत एवं सख्त सिफारिशें जारी की हैं। अदालत का यह कदम कानूनी सहायता प्रणाली में पारदर्शिता लाने और वकीलों की चिंताओं को संतुलित करने के उद्देश्य से उठाया गया है, ताकि न्यायिक प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की असुविधा या असमंजस की स्थिति उत्पन्न न हो सके।
कार्यान्वयन के लिए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की मंजूरी
इन महत्वपूर्ण सिफारिशों को लागू करने के लिए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश अश्विनी कुमार मिश्रा की तरफ से आधिकारिक रूप से मंजूरी प्रदान कर दी गई है। उनकी अनुमति मिलने के बाद ही इन दिशा-निर्देशों को औपचारिक रूप से जारी किया गया है, जिनका उद्देश्य निचली अदालतों में इस प्रणाली के क्रियान्वयन के दौरान आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों को दूर करना और कानूनी सहायता के हकदार जरूरतमंदों तक न्याय की सुगम पहुंच सुनिश्चित करना है।
सीधे एलएडीसी नियुक्त करने पर लगाई गई रोक
जारी की गई इन नई सिफारिशों के अंतर्गत यह बिल्कुल स्पष्ट कर दिया गया है कि यदि किसी मामले में आरोपी का अपना निजी अधिवक्ता अदालत की सुनवाई के दौरान उपस्थित नहीं होता है, तो अदालत बिना किसी निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए सीधे तौर पर एलएडीसी की नियुक्ति नहीं कर सकेगी। सबसे पहले अदालत द्वारा वकील के अनुपस्थित रहने के ठोस कारण को न्यायिक रिकॉर्ड में दर्ज किया जाएगा और इसकी विधिवत सूचना संबंधित आरोपी अथवा उसके वकील को अनिवार्य रूप से दी जाएगी।
डीएलएसए सचिव को मामला भेजने की तय प्रक्रिया
यदि तय की गई पूरी प्रक्रिया के बावजूद अगली तारीख पर भी आरोपी या उसका निजी वकील अदालत में पेश नहीं होता है, केवल तभी उस मामले को आगे की कार्रवाई के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण यानी डीएलएसए के सचिव के पास भेजा जा सकेगा ताकि एलएडीसी की नियुक्ति की जा सके। इस संबंध में रजिस्ट्रार जनरल चंद्रशेखर द्वारा पंजाब, हरियाणा तथा केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के सभी जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को पत्र जारी करते हुए इन सभी सिफारिशों को सभी संबंधित न्यायिक अधिकारियों व प्राधिकरणों तक समय पर पहुंचाने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।


