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    ईरान युद्ध के बाद अमेरिका की मिसाइल ढाल पर सवाल, क्या खत्म हो रहे इंटरसेप्टर?

    वाशिंगटन: अमेरिका और इजराइल द्वारा 28 फरवरी को ईरान पर किए गए साझा हमले के बाद से मध्य पूर्व में भड़का युद्ध अब भी लगातार जारी है। इस भीषण युद्ध के इतने लंबे खिंचने और इसके व्यापक गंभीर परिणामों का अनुमान शायद अमेरिका को भी नहीं था। इस युद्ध में केवल ईरान को ही भारी तबाही का सामना नहीं करना पड़ रहा है, बल्कि अमेरिका, इजराइल और मध्य पूर्व के कई अन्य देश भी इसकी चपेट में आकर भारी नुकसान उठा रहे हैं।

    अमेरिकी मिसाइल डिफेंस सिस्टम के स्टॉक में आई ऐतिहासिक कमी

    ईरान के खिलाफ जारी इस भीषण युद्ध के कारण अमेरिका के पास अपने सबसे महत्वपूर्ण मिसाइल रक्षा प्रणालियों के इंटरसेप्टर्स का भंडार खतरनाक स्तर तक नीचे गिर गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, अमेरिकी सेना ने युद्ध शुरू होने के बाद से अपनी प्रतिष्ठित 'थाड' (THAAD) एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल प्रणाली के लगभग 80 प्रतिशत और 'पैट्रियट' (Patriot) इंटरसेप्टर के करीब 50 प्रतिशत स्टॉक का इस्तेमाल कर लिया है। इसके अतिरिक्त, युद्ध के शुरुआती चरण में ही अमेरिका अपनी लंबी दूरी की 'टॉमहॉक' मिसाइलों का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा खत्म कर चुका था।

    सैन्य सलाहकारों की चेतावनी और रक्षा तैयारियों पर प्रभाव

    रक्षा विशेषज्ञों और सूत्रों का कहना है कि गोला-बारूद और मिसाइल डिफेंस स्टॉक की इसी तीव्र कमी के कारण सलाहकारों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान पर किसी बड़े हमले की योजना को फिलहाल टालने का सुझाव दिया था। अनुमानों के अनुसार, युद्ध शुरू होने से पहले अमेरिकी सेना के पास लगभग 2,200 पैट्रियट और 452 थाड मिसाइलें मौजूद थीं। लगातार जारी संघर्ष के चलते सेना ने अपनी कई बेहद सटीक और लंबी दूरी तक मार करने वाली सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों का लगभग पूरा भंडार इस्तेमाल कर लिया है।

    मध्य पूर्व में स्थित अमेरिकी ठिकानों और सहयोगी देशों पर बढ़ता खतरा

    मिसाइल और एयर डिफेंस सिस्टम की इस भारी कमी ने मध्य पूर्व के उन देशों की चिंता बढ़ा दी है जहाँ अमेरिकी सैन्य अड्डे मौजूद हैं। ये सभी देश मुख्य रूप से अमेरिका की वायु रक्षा प्रणाली पर ही निर्भर हैं। रक्षा अधिकारियों का मानना है कि स्टॉक में आई इस बड़ी गिरावट के कारण भविष्य में ईरान की तरफ से होने वाले किसी भी बड़े मिसाइल या ड्रोन हमले को नाकाम करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकता है, जिससे पूरे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर संकट मंडरा रहा है।

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