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    Homeराज्यबिहारस्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल: एंबुलेंस के इंतजार में गई जान

    स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल: एंबुलेंस के इंतजार में गई जान

    जामताड़ादेश की चरमराती स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक उदासीनता का एक बेहद हृदयविदारक मामला सामने आया है। समय पर आपातकालीन चिकित्सा सहायता न मिलने के कारण एक मरणासन्न मरीज को ट्रैक्टर-ट्रॉली पर चारपाई लादकर अस्पताल ले जाना पड़ा, जहां उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया। इस विचलित करने वाली घटना ने सरकारी दावों और आपातकालीन एंबुलेंस सेवाओं की जमीनी हकीकत की पोल खोलकर रख दी है। पूरा वाकया जामताड़ा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली गोपालपुर पंचायत के शहरबेड़ा गांव का है, जहां शुक्रवार 12 जून की रात को मोनू टुडू नामक युवक की अचानक तबीयत बेहद खराब हो गई। उसकी बिगड़ती हालत को देख घबराए परिवार वालों ने तत्काल सरकारी 108 एंबुलेंस सेवा को फोन मिलाया, परंतु आरोप है कि बार-बार मिन्नतें करने और मदद की गुहार लगाने के बाद भी एंबुलेंस गांव नहीं पहुंची।

    मजबूर परिजनों ने ट्रैक्टर पर चारपाई रखकर तय किया सफर

    जब सिस्टम की तरफ से कोई मदद नहीं मिली और मरीज की स्थिति लगातार नाजुक होती गई, तो असहाय परिजनों और ग्रामीणों ने अपनी तरफ से प्रयास करने का फैसला किया। गांव में मौजूद एक ट्रैक्टर की ट्रॉली पर खटिया बिछाई गई और उस पर बीमार मोनू टुडू को लिटाकर जैसे-तैसे जामताड़ा सदर अस्पताल पहुंचाया गया। दुर्भाग्यवश, एंबुलेंस न मिलने के कारण रास्ते में ही काफी कीमती समय बर्बाद हो चुका था। अस्पताल पहुंचने के तुरंत बाद चिकित्सकों ने मरीज का इलाज शुरू भी किया, लेकिन समय पर प्राथमिक चिकित्सा न मिलने के कारण उपचार के दौरान ही उसने दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद से मृतक के परिवार में कोहराम मचा हुआ है और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।

    चूक की कड़ियों को जोड़ने के लिए सिविल सर्जन ने दिए जांच के निर्देश

    इस पूरे गंभीर मामले पर संज्ञान लेते हुए जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी यानी सिविल सर्जन डॉ. शिव प्रसाद मिश्रा ने कहा कि यह घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और इसमें कहां पर लापरवाही हुई है, इसकी विस्तृत जांच कराई जाएगी। उन्होंने आश्वस्त किया कि जांच दल इस बात की विशेष पड़ताल करेगा कि परिजनों द्वारा किए गए कॉल के बाद भी 108 आपातकालीन एंबुलेंस सेवा समय पर क्यों नहीं उपलब्ध हो सकी। इसके लिए कॉल सेंटर के रिकॉर्ड भी खंगाले जाएंगे और यदि किसी भी स्तर पर प्रशासनिक या तकनीकी चूक पाई जाती है, तो दोषियों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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