नई दिल्ली। निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कांग्रेस पार्टी ने आयोग के कामकाज को लेकर नाराजगी जताई है और सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। पार्टी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उन्हें जवाबदेह ठहराए जाने की बात कही है।
फॉर्म-6 में अवैध संशोधन का आरोप
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट के जरिए दावा किया कि निर्वाचन आयोग ने बिना किसी आधिकारिक अधिसूचना के फॉर्म-6 में चुपचाप बदलाव किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जुलाई 2026 की शुरुआत में ऑनलाइन फॉर्म में एक नया अनिवार्य खंड जोड़ा गया, जिसके तहत पहली बार के मतदाताओं से यह जानकारी मांगी जा रही है कि उनके माता-पिता या दादा-दादी पिछले एसआईआर में शामिल थे या नहीं। रमेश के अनुसार, यह नया नियम विशेषकर युवा और नए मतदाताओं के लिए पंजीकरण प्रक्रिया को बेहद जटिल बना रहा है।
कानूनी प्रक्रिया के उल्लंघन का दावा
पार्टी का कहना है कि निर्वाचन आयोग के पास फॉर्म-6 में इस तरह का एकतरफा संशोधन करने का कोई अधिकार नहीं है। 'पंजीकरण निर्वाचक नियम, 1960' का हवाला देते हुए रमेश ने बताया कि ऐसे बदलावों के लिए नियमों में विधिवत संशोधन किया जाना और संसद को इसकी जानकारी देना अनिवार्य होता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि अन्य चुनाव आयुक्तों ने भी इस अनधिकृत बदलाव को वापस लेने की मांग की थी ताकि युवाओं को परेशानी का सामना न करना पड़े।
सुप्रीम कोर्ट से स्वतः संज्ञान की मांग
जयराम रमेश ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उनके कार्यकाल के दौरान संवैधानिक परंपराओं और संसद द्वारा बनाए गए कानूनों की लगातार अनदेखी की जा रही है। कांग्रेस ने मांग की है कि देश की सर्वोच्च अदालत इस पूरे मामले का स्वतः संज्ञान ले और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष जांच कर जवाबदेही सुनिश्चित करे।


