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    17 जून को रक्तदान के लिए आगे आएंगे रेलकर्मी और नागरिक, विशाल शिविर का आयोजन

    जबलपुर: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) नई दिल्ली से मान्यता प्राप्त और रेलवे में प्राथमिक चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने वाली प्रतिष्ठित संस्था 'सेंट जॉन एंबुलेंस ब्रिगेड' द्वारा आगामी 17 जून को एक विशाल रक्तदान शिविर का आयोजन किया जा रहा है। यह जीवन रक्षक शिविर रेलवे मुख्य चिकित्सालय के सर्वसुविधाजनक ऑडिटोरियम में संपन्न होगा। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. शैलेंद्र दीक्षित एवं डॉ. संदीप चौहान के कुशल निर्देशन में आयोजित होने वाले इस चौथे रक्तदान शिविर को सफल बनाने के लिए संस्था ने कमर कस ली है। इसके तहत मंडल और मुख्यालय के विभिन्न रेल कार्यालयों में व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है, जहाँ संस्था के प्रतिनिधि रेल कर्मचारियों से व्यक्तिगत संपर्क कर उन्हें 'रक्तदान-महादान' के इस पुनीत कार्य में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

    दूसरों की जिंदगी बचाने के लिए आगे आने की अपील

    संस्था के मंडल सचिव सादिक खान, देवेंद्र कुमार और अनिल वानखेड़े सहित अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों ने उत्तर-मध्य रेलवे के समस्त स्टाफ, अधिकारियों और उनके परिजनों से मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए इस पुण्य कार्य में सहभागिता की अपील की है। पदाधिकारियों का कहना है कि आपका दिया हुआ रक्त किसी आपातकाल में किसी मरीज की जिंदगी को नया मोड़ दे सकता है।

    रेलवे की विशेष पहल: रक्तदाताओं को प्रोत्साहन और सुविधाएं

    रेलवे प्रशासन द्वारा समाज कल्याण के इस कार्य में भाग लेने वाले कर्मचारियों के लिए विशेष सुविधाओं का प्रावधान किया गया है:

    • विशेष अवकाश: रक्तदान करने वाले प्रत्येक रेल कर्मचारी को विभाग की ओर से एक दिन का सवैतनिक विशेष अवकाश (लीव) प्रदान किया जाता है।

    • भविष्य की सुरक्षा: आपातकालीन परिस्थितियों या किसी बीमारी के समय यदि रक्तदाता या उनके परिवार को रक्त की आवश्यकता पड़ती है, तो प्राथमिकता के आधार पर उन्हें संग्रहित ब्लड बैंक से रक्त उपलब्ध कराया जाता है।

    उल्लेखनीय है कि सेंट जॉन एंबुलेंस ब्रिगेड द्वारा पूर्व में आयोजित किए गए तीनों शिविरों को भी रेलवे स्टाफ का अभूतपूर्व समर्थन मिला था, जिसमें सैकड़ों यूनिट रक्त एकत्रित किया गया था। इस बार भी प्रशासन को उम्मीद है कि युवा रेल कर्मचारी और सामाजिक संस्थाएं रिकॉर्ड तोड़ संख्या में पहुँचकर मानव सेवा के इस अनुकरणीय उदाहरण का हिस्सा बनेंगी।

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