जयपुर: पश्चिम रेलवे के विभिन्न रेलखंडों में जारी मूसलाधार बारिश के चलते रेल पटरियों पर पानी भर जाने से रेल यातायात गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है। उत्तर-पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी अमित सुदर्शन ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि अमलसाड-बिलीमोरा तथा घोलवड़-उमरगाम रोड स्टेशनों के बीच स्थित रेलवे ट्रैक और पुल संख्या-203 पर नदियों का जलस्तर खतरे के निशान तक पहुंच गया है। सुरक्षात्मक दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए रेलवे प्रशासन ने कई प्रमुख ट्रेनों के परिचालन में बदलाव करते हुए उन्हें पूरी तरह रद्द, आंशिक रद्द या फिर परिवर्तित मार्गों से चलाने का फैसला किया है।
भारी जलभराव के चलते प्रमुख यात्री रेल सेवाएं रद्द
ट्रैफिक में आए इस व्यवधान के कारण जोधपुर, जैसलमेर, बांद्रा और मुंबई सेंट्रल रूट की कई ट्रेनें निरस्त कर दी गई हैं। इनमें भगत की कोठी–बांद्रा टर्मिनस एक्सप्रेस, भिवानी–मुंबई सेंट्रल एक्सप्रेस और जैसलमेर–बांद्रा टर्मिनस एक्सप्रेस की सेवाएं प्रमुख रूप से शामिल हैं। इसके साथ ही आगामी दिनों में संचालित होने वाली जोधपुर–हडपसर एक्सप्रेस तथा हडपसर–जोधपुर एक्सप्रेस को भी रेल प्रशासन ने एहतियातन रद्द करने की घोषणा की है।
वैकल्पिक रेल मार्गों से संचालित होंगी प्रभावित ट्रेनें
रेल पटरियों से जलभराव की स्थिति सामान्य होने तक रेलवे ने लंबी दूरी की कुछ रेलगाड़ियों का मार्ग परिवर्तित कर चलाने का निर्णय लिया है। इसके तहत दौंड–अजमेर एक्सप्रेस को मनमाड, जलगांव, पालधी और सूरत के वैकल्पिक रूट से गंतव्य की ओर रवाना किया जाएगा। ट्रैक सुधरने तक अन्य ट्रेनों के परिचालन को भी इसी प्रकार जरूरत के अनुसार व्यवस्थित किया जा सकता है।
रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट और हेल्पलाइन पर स्थिति जांचने का परामर्श
अचानक हुए इस बदलाव से यात्रियों को होने वाली असुविधा को कम करने के लिए उत्तर-पश्चिम रेलवे ने विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। रेलवे प्रशासन ने सभी सम्मानित यात्रियों से आग्रह किया है कि वे अपने स्टेशनों के लिए निकलने से पूर्व राष्ट्रीय ट्रेन पूछताछ प्रणाली (NTES) ऐप, आधिकारिक वेबसाइट अथवा हेल्पलाइन के जरिए अपनी संबंधित ट्रेन का वर्तमान स्टेटस अवश्य जांच लें।
सुरक्षा के मद्देनजर रेलवे अधिकारियों की पल-पल पर पैनी नजर
अत्यधिक वर्षा वाले संवेदनशील क्षेत्रों में रेल पटरियों और पुल-पुलियों की स्थिति पर वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी जारी है। जलस्तर कम होते ही ट्रैक की तकनीकी जांच कराई जाएगी, जिसके पश्चात ही ट्रेनों का नियमित संचालन दोबारा शुरू किया जा सकेगा। रेलवे का प्राथमिक उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और जल्द से जल्द यातायात व्यवस्था को पटरी पर लाना है।


