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    इंदौर-भोपाल समेत 25 जिलों में बरस सकते हैं बादल, दशहरे पर मौसम बिगड़ने के आसार

    भोपाल। मध्य प्रदेश में सक्रिय हुए चक्रवातीय परिसंचरण और मजबूत ट्रफ लाइनों के प्रभाव के चलते राज्य के विभिन्न संभागों में मौसम का मिजाज बदला हुआ है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, आज विजयादशमी के पावन अवसर पर भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, नर्मदापुरम और सागर संभाग के लगभग 25 जिलों में झमाझम बारिश होने की प्रबल संभावना जताई गई है। इस दौरान हवाओं की रफ्तार 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक बनी रह सकती है। हालांकि इसके विपरीत जबलपुर, रीवा और शहडोल संभाग के अनेक जिलों में दिन के समय तेज और चमकदार धूप खिलने का अनुमान है।

    कई जिलों में बदला मौसम का मिजाज और तापमान की स्थिति

    बीते सोमवार को प्रदेश के सीहोर, इंदौर और सागर समेत कई अन्य जिलों में झमाझम वर्षा दर्ज की गई, जिससे तापमान में हल्की गिरावट महसूस की गई। इसके अलावा गुना, शाजापुर, मंदसौर, उज्जैन, आगर-मालवा, अशोकनगर, शिवपुरी, श्योपुर, बुरहानपुर, खंडवा, हरदा, बैतूल और छिंदवाड़ा में भी बादलों की आवाजाही के साथ मौसम का मिजाज बदला रहा। तापमान के मोर्चे पर बात करें तो छिंदवाड़ा, कटनी, आलीराजपुर, गुना और नीमच में न्यूनतम तापमान 17 से 18 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया गया, जबकि खंडवा, उज्जैन, खरगोन, रतलाम, राजगढ़ और रायसेन जैसे जिलों में अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना रहा।

    विजयादशमी पर बारिश की चेतावनी और रावण दहन की तैयारियां

    मौसम केंद्र की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार आज विजयादशमी के दिन भोपाल, इंदौर, उज्जैन, आलीराजपुर, धार, बड़वानी, खरगोन, बुरहानपुर, खंडवा, हरदा, बैतूल, देवास, शाजापुर, आगर-मालवा, राजगढ़, रायसेन, सागर, विदिशा, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर में बारिश होने के आसार हैं। खराब मौसम और बारिश की संभावनाओं को देखते हुए कई जिलों में खुले मैदानों में रखे रावण के विशाल पुतलों को भीजने से बचाने के लिए तिरपाल व प्लास्टिक से सुरक्षित रूप से ढंक दिया गया है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 22 और 23 अक्टूबर तक पश्चिमी मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में यह बारिश का दौर जारी रह सकता है, जिसके बाद 23 अक्टूबर के बाद से मौसम के पूरी तरह साफ होने की उम्मीद है। अक्टूबर माह के अंतिम दिनों से रात के पारे में तेजी से गिरावट आएगी और सर्दी का अहसास भी बढ़ने लगेगा।

    मौसम प्रणालियों का असर और मानसून सत्र का संपूर्ण आंकलन

    मौसम विज्ञानियों के मुताबिक, वर्तमान में दक्षिण-पश्चिम राजस्थान से उत्तर-पूर्व अरब सागर तक एक ट्रफ रेखा माध्य समुद्र तल से 3.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर सक्रिय है। इसके साथ ही दक्षिण राजस्थान और उत्तर-पश्चिम उत्तर प्रदेश के ऊपर हवा के चक्रवातीय परिसंचरण बने हुए हैं, जिनके सम्मिलित प्रभाव से मध्य प्रदेश में नमी आ रही है और बारिश की गतिविधियां बनी हुई हैं। यदि इस वर्ष के संपूर्ण मानसून सत्र की बात करें तो प्रदेश में मानसून लगभग 100 दिनों तक सक्रिय रहा। इस दौरान कुल 908.4 मिलीमीटर यानी 35.8 इंच वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य कोटे की तुलना में लगभग चार प्रतिशत कम रही। पूर्वी हिस्से में सामान्य से अधिक पानी गिरा, जबकि पश्चिमी अंचल में औसत से 12 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई।

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