किशनगंज। भारत-नेपाल सीमा से सटे इस सीमावर्ती जिले के ठाकुरगंज प्रखंड अंतर्गत दल्लेगांव से एक ऐसी विचलित करने वाली तस्वीर सामने आई है, जिसने बुनियादी विकास के दावों की पोल खोल कर रख दी है। सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहे एक वीडियो और तस्वीरों में एक दूल्हा अपनी बारात के साथ उफनती हुई मेची नदी को पार करने के लिए ग्रामीणों के कंधों पर सवार दिखाई दे रहा है। सुदूर इलाके के इस गांव में नदी पर पुल की सुविधा न होने के कारण पूरी बारात को इसी प्रकार जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ी।
कंधों का सहारा लेकर पार हुआ उफनता दरिया
प्राप्त विवरण के अनुसार, दल्लेगांव में एक विवाह समारोह संपन्न होना था, जिसमें शामिल होने आ रही बारात के रास्ते में मेची नदी मुख्य बाधा बनी हुई थी। मानसूनी बारिश के कारण नदी का जलस्तर काफी बढ़ा हुआ था और वहां चल रहा पुल का निर्माण कार्य अधूरा होने के कारण आवागमन पूरी तरह अवरुद्ध था। नदी पार करने का कोई अन्य सुरक्षित जरिया या नाव उपलब्ध न होने पर स्थानीय ग्रामीणों ने सूझबूझ दिखाई और दूल्हे को अपने कंधों पर बिठाकर अत्यंत सावधानी से नदी के दूसरे किनारे तक पहुंचाया। इस अनोखी और लाचारी से भरी विदाई का वीडियो वहां उपस्थित किसी ग्रामीण ने अपने कैमरे में सहेज लिया, जो अब इंटरनेट पर खूब सुर्खियां बटोर रहा है।
वर्षों से अधर में लटका है सेतु का निर्माण
क्षेत्रीय नागरिकों ने इस अव्यवस्था पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए बताया कि दल्लेगांव और उसके समीपवर्ती दर्जनों गांवों को मुख्य सड़क मार्ग से जोड़ने के उद्देश्य से मेची नदी पर पुल का निर्माण कार्य वर्षों पूर्व स्वीकृत और शुरू किया गया था, परंतु प्रशासनिक ढुलमुल नीति के कारण यह आज तक मुकम्मल नहीं हो पाया। शुष्क मौसम में तो ग्रामीण नदी की उथली धारा को जैसे-तैसे लांघ लेते हैं, किंतु वर्षा ऋतु आते ही पूरा क्षेत्र टापू में तब्दील हो जाता है। पुल न होने का खामियाजा प्रतिदिन स्कूल जाने वाले नौनिहालों, गंभीर मरीजों, अपनी उपज मंडी तक ले जाने वाले किसानों और आम राहगीरों को भुगतना पड़ता है। कई बार चिकित्सा आपातकाल के समय लोग जान हथेली पर रखकर उफनते पानी के बीच से गुजरने को मजबूर होते हैं।
वायरल दृश्यों ने खड़े किए व्यवस्था पर गंभीर सवाल
दूल्हे को कंधों पर बिठाकर नदी पार कराने के इस दृश्य ने सोशल मीडिया पर एक नई बहस छेड़ दी है। जहां एक तरफ लोग विषम परिस्थितियों में ग्रामीणों द्वारा की गई इस आपसी सहायता और अनूठे अंदाज की तारीफ कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ नेटिजन्स और स्थानीय जनता अधूरे पड़े बुनियादी ढांचे को लेकर शासन-प्रशासन तथा क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर तीखे सवाल उठा रही है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि जब तक इस महत्वपूर्ण सेतु का निर्माण कार्य पूर्ण नहीं हो जाता, तब तक हजारों की आबादी को प्रतिवर्ष इसी प्रकार की जानलेवा दिक्कतों से दो-चार होना पड़ेगा। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मॉनसून की गंभीरता को देखते हुए इस दिशा में त्वरित और ठोस कदम उठाने की पुरजोर मांग की है।


