भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की सक्रियता अचानक कम होने से मौसम के मिजाज में बड़ा बदलाव आ गया है। पिछले छह दिनों से मूसलाधार बारिश का सिलसिला थमने के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में जुलाई के महीने में ही मार्च और अप्रैल जैसी भीषण गर्मी का अहसास होने लगा है। चिलचिलाती धूप और उमस के कारण पारा 35 से 36 डिग्री सेल्सियस के पार दर्ज किया जा रहा है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, आगामी पांच दिनों तक राज्य में भारी वर्षा के आसार बेहद कम हैं, हालांकि आसमान में आंशिक बादल छाए रहने और कुछ स्थानों पर हल्की बौछारें पड़ने की संभावना जरूर है।
बारिश के आंकड़ों में गिरावट, पूर्वी हिस्से में हालात चिंताजनक
लगातार एक सप्ताह से सूखे जैसे हालात रहने के कारण प्रदेश में बारिश का कुल कोटा प्रभावित हुआ है। चालू सीजन में अब तक राज्य में औसतन 241.8 मिलीमीटर (लगभग 9.5 इंच) वर्षा रिकॉर्ड की गई है, जो सामान्य औसत 260 मिलीमीटर (लगभग 10.2 इंच) से 7 फीसदी कम है। भौगोलिक दृष्टि से देखें तो पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, सागर, शहडोल और रीवा संभागों में स्थिति अधिक नाजुक है, जहां सामान्य से 21 प्रतिशत कम पानी गिरा है। इसके विपरीत, भोपाल, इंदौर और ग्वालियर-चंबल समेत पश्चिमी क्षेत्र में यह कमी केवल 6 प्रतिशत दर्ज की गई है।
आज दो दर्जन से अधिक जिलों में हल्की बौछारें संभव
मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक, बुधवार को इंदौर, उज्जैन, रतलाम, धार, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, शहडोल और रीवा समेत करीब 21 जिलों में स्थानीय स्तर पर बूंदाबांदी या हल्की वर्षा हो सकती है। इसके उलट, राजधानी भोपाल सहित रायसेन, सीहोर, विदिशा, नर्मदापुरम, ग्वालियर, गुना और जबलपुर जैसे बड़े हिस्से में फिलहाल राहत की उम्मीद नहीं है। इन क्षेत्रों में तेज धूप और उमस के चलते दिन के तापमान में और अधिक बढ़ोतरी होने की आशंका जताई गई है।


