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    राजस्थान ट्रेड प्रमोशन पॉलिसी 2025: ऑनलाइन आवेदन शुरू

    जयपुर। प्रदेश के व्यापारियों को प्रोत्साहित करने के लाई गई राजस्थान ट्रेड प्रमोशन पॉलिसी-2025 के तहत आवेदन शुरू हो गए हैं। स्वयं की एसएसओ आईडी या ई-मित्र के माध्यम से आवेदन किए जा सकते हैं। इस नीति के तहत खुदरा व्यापारियों को 2 करोड़ रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। इसपर राज्य सरकार 6 प्रतिशत तक ब्याज अनुदान और इंश्योरेंस प्रीमियम पर 50 प्रतिशत तक की सहायता सहित अन्य लाभ देगी।

    उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने बताया कि राजस्थान में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के मार्गदर्शन में व्यापार क्षेत्र में इस प्रकार की नीति पहली बार लाई गई है। इसका उद्देश्य प्रदेश के छोटे व्यापारियों को बड़े ट्रेड, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और लॉजिस्टिक नेटवर्क जैसे समान अवसर उपलब्ध कराना है। इससे व्यापार क्षेत्र में निवेश वृद्धि होने के साथ ही रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

    10.5 लाख से अधिक खुदरा व्यापारियों को मिलेगा व्यापार बढ़ाने का अवसर—

    कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने बताया कि इस नीति से राज्य का खुदरा और थोक व्यापार सशक्त होगा। यह नीति राज्य में 10.5 लाख से अधिक रिटेल स्टोर्स और तेजी से बढ़ते उपभोक्ता बाजार को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है। यह व्यापार क्षेत्र में निवेश बढ़ाने, रोजगार सृजन करने, छोटे ट्रेडर्स को बाजार एवं ऋण तक आसान पहुंच उपलब्ध करवाने तथा खुदरा व थोक व्यापार में एमएसएमई उद्यमों के विकास के लिए कार्य करेगी।

    नए सूक्ष्म व्यापारी उद्यमों की स्थापना के लिए एक करोड़ रुपये तक के ऋण पर 6 प्रतिशत तथा एक करोड़ से 2 करोड़ रुपये तक के ऋण पर 4 प्रतिशत तक ब्याज अनुदान दिया जाएगा। महिला, एससी, एसटी, दिव्यांगजन व्यापारियों को एक करोड़ से अधिक एवं 2 करोड़ रुपये तक के ऋण पर एक प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज अनुदान देय होगा।

    सीजीटीएमएसई (सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट) योजना के तहत 5 करोड़ रुपये तक के ऋण के कवरेज के लिए देय गारंटी फीस का 5 वर्षों तक 50 प्रतिशत पुनर्भरण किया जाएगा।

    सूक्ष्म व्यापारी उद्यमों को 5 वर्ष तक इंश्योरेंस प्रीमियम पर 50 प्रतिशत (अधिकतम 1 लाख रुपये प्रति वर्ष) तक की सहायता का प्रावधान है।

    ई-कॉमर्स के प्रयोग को प्रोत्साहन के लिए एक वर्ष तक प्लेटफॉर्म फीस का 75 प्रतिशत (अधिकतम 50 हजार रुपये) तक की सहायता दी जाएगी।

     

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