राजसमंद: जिले के भीम उपखंड मुख्यालय पर स्थित ब्रिटिशकालीन ऐतिहासिक उप-जेल को प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए पूरी तरह खाली कर दिया गया है। जेल उप महानिरीक्षक (उदयपुर रेंज) के आदेशानुसार, यहां बंद सभी कैदियों को ब्यावर जिला कारागृह भेज दिया गया है। इस औचक फैसले के बाद क्षेत्र में जेल के स्थायी रूप से बंद होने की चर्चाएं तेज हो गई हैं, जिससे स्थानीय लोगों और बंदियों के परिजनों में चिंता का माहौल है।
स्टाफ की कमी और सीमित क्षमता बनी बड़ी बाधा
भीम उप-जेल की क्षमता मात्र 6 बंदियों की है, जबकि यहां हर साल औसतन 500 से अधिक आरोपियों का आवागमन रहता था। वर्तमान व्यवस्था के तहत जेल के 14 में से 10 कर्मचारियों को डूंगरपुर जिला कारागृह में तैनात कर दिया गया है, जबकि केवल 4 प्रहरियों को प्रशासनिक कार्यों के लिए भीम में ही रखा गया है। विभाग के नए आदेशों के मुताबिक, अब भविष्य में आने वाले नए बंदियों को भी कागजी कार्यवाही पूरी करने के बाद सीधे ब्यावर जेल भेजा जाएगा।
परिजनों पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ और न्यायिक जटिलताएं
जेल खाली होने से सबसे ज्यादा परेशानी गरीब और ग्रामीण परिवारों को होगी। अब बंदियों से मिलने के लिए उनके परिजनों को करीब 70 किलोमीटर दूर ब्यावर का सफर तय करना पड़ेगा, जिससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी होगी। इसके अलावा, भीम का न्यायिक क्षेत्र राजसमंद जिला मुख्यालय से जुड़ा है, जो यहां से 100 किलोमीटर दूर है। बंदियों के ब्यावर शिफ्ट होने से वकीलों और अदालती कार्यवाही के लिए समन्वय बिठाना भी अब चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।
नए भवन का प्रस्ताव फाइलों में दबा, जनता ने की बहाली की मांग
भीम उप-जेल के विस्तार के लिए मार्च 2025 में टोगी के नंदावट क्षेत्र में 15 बीघा जमीन आवंटित की गई थी। बजट और निर्माण के प्रस्ताव उच्च अधिकारियों को भेजे जा चुके हैं, लेकिन अभी तक धरातल पर काम शुरू नहीं हो पाया है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सरकार से मांग की है कि ऐतिहासिक महत्व और क्षेत्र की आवश्यकता को देखते हुए इस जेल को बंद करने के बजाय सुविधाओं का विस्तार कर इसे पुनः सुचारू किया जाए।


