अलवर/सरिस्का टाइगर रिजर्व में बाघों और उनके शावकों का तेजी से विकास जारी है। हाल ही में, सरिस्का के अलवर बफर जोन में बाघिन एसटी-27 को अपने तीन शावकों के साथ खेलते हुए देखा गया है। इन शावकों की उम्र एक साल से अधिक हो चुकी है और एक साल बाद ये शावक अपनी मां से अलग होकर अपनी नई टैरिटरी बनाएंगे। इसीलिए, बाघिन एसटी-27 अब उन्हें जंगल में रहने के तरीकों का प्रशिक्षण देती नजर आई।
वन्यजीव विशेषज्ञ एवं नेचर गाइड लोकेश खंडेलवाल ने बताया कि जंगल में बाघों के रहने के अपने नियम और तौर तरीके होते हैं। जंगल में जो शक्तिशाली होता है वही राज करता है। सरिस्का टाइगर रिजर्व अलवर बफर जोन के जंगल बाला लिवारी में बाघिन एसटी— 19 के करीब एक साल के हो चुके शावक दूसरे को खदेड़ने का कुछ ऐसा ही प्रशिक्षण लेते नजर आए। पर्यटकों ने शावकों की अठखेलियों को कैमरे में कैद किया। अभी ये शावक मां बाघिन एसटी—19 के सानिध्य में शिकार करने एवं जंगल में रहने की ट्रेनिंग ले रहे है। जंगल में वाटर होल के पास शांत बैठी बाघिन के सामने ही शावक एक दूसरे को खदेडते नजर आए। तीनों शावक करीब दो साल तक मां के साथ रहेंगे, इसके बाद धीरे—धीरे तीनों अपनी टेरीटरी बनाएंगे। इस दौरान मां और पिता के साथ—साथ तीनों के बीघ संषर्घ की संभावना बढ़ जाती है। इनमें जो शक्तिशाली होगा, वहीं रुकेगा शेष इस इलाके को छोडकर दूसरी जगह अपनी टेरीटरी बनाएंगे।
अलवर बफर जोन में है पांच शावक, एक बाघ एवं बाघिन
टाइगर रिजर्व सरिस्का के बफर जोन में अभी सात बाघ हैं। इनमें पांच शावक एवं एक बाघ एवं बाघिन है। ये बाघ व बाघिन कई साल पहले टैरिटरी की तलाश में सरिस्का के कोर से इलाके से चलकर अलवर बपफर जोन में पहुंचे थे और यहीं अपनी टैरिटरी बनाकर रह रहे हैं। इन बाघ— बाघिन ने अभी तक पांच शावकों ने जन्म दिया है।
बफर जोन में बाघों की अच्छी साइटिंग
अलवर बफर जोन में पर्यटकों को बाघों की साइटिंग आसानी से हो रही है। आगामी एक जुलाई से सरिस्का में पर्यटकों का प्रवेश तीन महीने के लिए बंद रहेगा। इस दौरान सरिस्का के पांडुपोल मार्ग के अलावा अलवर बफर जोन में ही पर्यटकों को घूमने की अनुमति रहेगी। अलवर बफर जोन के रेंजर शंकरसिंह शेखावत ने बताया कि अब यहां भी सरिस्का की तरह पर्यटकों को बाघों की अच्छी साइटिंग हो रही है। आगामी मानसून के दौरान यहां बाघों की पर्यटकों को अच्छी साइटिंग होने की उम्मीद है

