भोपाल: मध्य प्रदेश में अब बिना पंजीकरण के लिव-इन रिलेशनशिप में रहना कानूनन अपराध माना जाएगा। राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में गठित उच्च स्तरीय समिति ने सोमवार शाम को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को अपना अंतिम ड्राफ्ट सौंप दिया है। इस ड्राफ्ट में लिव-इन जोड़ों के रजिस्ट्रेशन से लेकर बहुविवाह पर रोक और सभी धर्मों के लिए एक समान नियम बनाने जैसी कई क्रांतिकारी सिफारिशें की गई हैं। सरकार इस ड्राफ्ट के आधार पर आगामी मानसून सत्र में ही यूसीसी बिल लाने की तैयारी में है।
लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण हुआ अनिवार्य
समिति की सबसे चर्चित सिफारिश लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर है। नए नियमों के प्रस्ताव के मुताबिक, अब लिव-इन में रहने वाले जोड़ों को रजिस्ट्रार के समक्ष अपना पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। रजिस्ट्रेशन के बाद रजिस्ट्रार इसकी एक प्रति संबंधित थाने को भेजेंगे और साथ ही उनके माता-पिता या अभिभावकों को भी इसकी लिखित जानकारी दी जाएगी। यदि कोई जोड़ा बिना पंजीकरण के लिव-इन में रहता हुआ पाया जाता है, तो इसे अपराध माना जाएगा और इसके लिए जेल की सजा का भी प्रावधान किया गया है।
सभी धर्मों के लिए विवाह पंजीकरण और कोर्ट से ही तलाक
यूसीसी के इस ड्राफ्ट में सामाजिक कुरीतियों और कानूनी विसंगतियों को दूर करने के लिए कई अन्य कड़े सुझाव दिए गए हैं:
अनिवार्य विवाह पंजीकरण: अब सभी धर्मों के लोगों के लिए शादी का रजिस्ट्रेशन कराना कानूनी रूप से अनिवार्य होगा, जिसके लिए 30 से 60 दिनों की समय सीमा तय की जा सकती है।
केवल कोर्ट से तलाक: मौखिक, एकतरफा या प्रथागत तलाक को पूरी तरह अवैध घोषित करते हुए कानूनी दंड के दायरे में लाया जाएगा। अब किसी भी धर्म में केवल अदालत के जरिए ही तलाक को मान्यता मिलेगी।
बहुविवाह पर पूर्ण रोक: पति या पत्नी के जीवित रहते या बिना कानूनी तलाक के दूसरी शादी करने पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। ऐसा करना दंडनीय अपराध की श्रेणी में आएगा।
समान संपत्ति अधिकार: पैतृक संपत्ति के उत्तराधिकार में बेटे और बेटियों को पूरी तरह से समान कानूनी अधिकार मिलेंगे, और यह नियम सभी धर्मों के नागरिकों पर समान रूप से लागू होगा।
आदिवासी और विशेष पिछड़ी जातियों को राहत
मध्य प्रदेश की अनूठी जनसांख्यिकी को ध्यान में रखते हुए इस कानून से आदिवासी समुदाय को पूरी तरह बाहर रखने की सिफारिश की गई है। इसके साथ ही राज्य की कई संकटग्रस्त और विशेष पिछड़ी जनजातियों को भी यूसीसी के दायरे से दूर रखा जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि आदिवासी संस्कृति और उनकी परंपराओं के संरक्षण के लिए उन्हें इस कानून की परिधि से बाहर रखा जाना जरूरी है।
कैसा है यूसीसी का यह फाइनल ड्राफ्ट?
समिति द्वारा तैयार किया गया यह ऐतिहासिक ड्राफ्ट कुल तीन विस्तृत खंडों में विभाजित है:
पहला खंड: इसमें कुल 10 अध्याय हैं, जिनमें समिति की मुख्य सिफारिशें, अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर के कानूनों और सामाजिक प्रथाओं का गहन विश्लेषण शामिल है।
दूसरा खंड: यह सीधे तौर पर प्रस्तावित विधेयक का कानूनी प्रारूप (बिल ड्राफ्ट) है, जिसमें 4 भाग, 404 धाराएं और 7 अनुसूचियां शामिल की गई हैं।
तीसरा खंड: इस खंड में राज्य भर से जुटाए गए जनपरामर्श की रिपोर्ट है, जिसमें वेबसाइट और व्यक्तिगत माध्यमों से प्राप्त कुल 9.58 लाख से अधिक जनता के सुझावों का विश्लेषण दर्ज है।
फिलहाल सरकार ने इस पूरे ड्राफ्ट को कानूनी और तकनीकी बारीकियों को परखने के लिए विधि विभाग के पास भेज दिया है। विभाग की हरी झंडी मिलते ही इसे कैबिनेट की मंजूरी के बाद विधानसभा के पटल पर रखा जाएगा।


