रायपुर: छत्तीसगढ़ से इस वक्त एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है। राज्यभर में वर्तमान में चल रहे सड़कों के मरम्मत और निर्माण कार्यों पर या तो पूरी तरह रोक लगा दी गई है या फिर इनकी गति बेहद धीमी कर दी गई है। इस भारी रुकावट की मुख्य वजह डामर (बिटुमेन) की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि को बताया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले महज छह महीनों के भीतर ही डामर के दाम 50,000 रुपये प्रति टन से बढ़कर सीधे 96,500 रुपये प्रति टन तक पहुँच चुके हैं।
लगभग 2 हजार करोड़ रुपये के निर्माण कार्य हुए प्रभावित
विभिन्न निर्माण एजेंसियों और ठेकेदारों का कहना है कि लागत में लगभग दोगुनी वृद्धि हो जाने के कारण सड़क निर्माण और डामरीकरण के करीब 2 हजार करोड़ रुपये के कार्य सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं। स्थिति यहाँ तक बिगड़ चुकी है कि राज्य में डामरीकरण के लगभग 90 प्रतिशत कार्यों पर इसका प्रतिकूल असर पड़ा है। डामर की कीमतें आसमान छूने के कारण कई जगहों पर निर्माण एजेंसियां नया काम शुरू करने से कतरा रही हैं, तो कई स्थानों पर पहले से चल रहे आधे-अधूरे कामों को भी बीच में ही रोक दिया गया है।
डामर की बढ़ती कीमतें और कमी बनी मुख्य चिंता, ठेकेदारों ने की रेट संशोधन की मांग
ज्ञात हो कि हाल ही में लोक निर्माण विभाग (PWD) की एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें विभाग के सचिव, प्रमुख अभियंता (ENC) और प्रमुख ठेकेदार शामिल हुए थे। इस बैठक में यह बात खुलकर सामने आई कि डामरीकरण के इस पीक सीजन में डामर की भारी कमी और इसकी बढ़ती हुई कीमतें विभाग और ठेकेदारों के लिए एक बहुत बड़ी चिंता का विषय बन गई हैं। 'कॉन्ट्रैक्टर एसोसिएशन' ने अब राज्य सरकार के सामने दरों (रेट) में संशोधन करने की पुरजोर मांग उठाई है। एसोसिएशन का स्पष्ट कहना है कि पुराने अनुबंधों में तय की गई पुरानी दरों पर मौजूदा आसमान छूती कीमतों के साथ काम करना पूरी तरह से घाटे का सौदा साबित हो रहा है।
प्रदेश की कई प्रमुख सड़कों का नवीनीकरण कार्य अटका
डामर के दाम दोगुने हो जाने के कारण छत्तीसगढ़ की कई अहम और व्यस्त सड़कों का निर्माण कार्य बीच में ही अटक गया है। उदाहरण के तौर पर, राजधानी रायपुर में रेलवे स्टेशन से लेकर सादानी दरबार तक बनने वाले 17 करोड़ रुपये की लागत के एक्सप्रेस-वे नवीनीकरण का टेंडर जारी होने के बावजूद, ठेका एजेंसी डामर महंगा होने के कारण अनुबंध करने से पीछे हट रही है, जिससे इस प्रमुख सड़क का काम शुरू नहीं हो पा रहा है।
इसी तरह, महासमुंद से तुमगांव तक जाने वाली 9 किलोमीटर लंबी सड़क के नवीनीकरण कार्य में एजेंसी ने 5 किलोमीटर तक डामरीकरण करने के बाद बढ़ी हुई कीमतों का हवाला देकर काम बीच में ही रोक दिया और वहाँ से हट गई, जिसके कारण सड़क का शेष 4 किलोमीटर हिस्सा अभी भी बदहाल और अधूरा पड़ा है। इसके अलावा, रायपुर जिले के अंतर्गत भैंसा भंडार से तेलसी तक की 30 किलोमीटर लंबी सड़क के लिए पीडब्ल्यूडी द्वारा एजेंसी तय किए जाने के बावजूद, लागत में भारी वृद्धि होने के कारण अभी तक काम शुरू नहीं हो सका है। इस कारण इस ऊबड़-खाबड़ और जर्जर सड़क से गुजरने वाले आम ग्रामीण और वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।


