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    टोल प्लाजा के पास ही उखड़ी सड़कें, फिर भी पूरी वसूली : सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद कंपनियां वसूल रहीं टैक्स

    नई दिल्ली। इस मानसून की बारिश ने देश के अनेक राज्यों से होकर गुजरने वाले नेशनल हाइवे की हालत खस्ता कर दी है। मध्यप्रदेश में ही नेशनल और स्टेट हाईवे जगह-जगह गड्ढों में तब्दील हो चुके हैं। बावजूद इसके टोल प्लाजा पर कंपनियां पूरी वसूली कर रही हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि यह सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश की सीधी अवहेलना है, जिसमें साफ कहा गया था कि जर्जर और अधूरी सड़कों पर टोल टैक्स नहीं लिया जा सकता। 
    यहां पर यदि मध्य प्रदेश की ही बात कर लें तो प्रदेश से होकर गुजरने वाले एनएच-46 (ग्वालियर–बैतूल), एनएच-47 (नागपुर–औबेदुल्लागंज), एनएच-45 (जयपुर–जबलपुर) के अलावा स्टेट हाईवे-18 (भोपाल–विदिशा), एसएच-63 (दमोह–सागर) और हरदा का एनएच-47 इन दिनों सबसे ज्यादा खराब हालत में है। मीडिया रिपोर्टों में खुलासा हो चुका है कि इन हाईवे पर रोजाना लाखों की वसूली हो रही है, जबकि वाहन चालकों को हर कुछ सौ मीटर पर गड्ढों से जूझना पड़ रहा है। जानकारी अनुसार गुना बायपास (एनएच-46): 12 किमी लंबे इस हिस्से पर हर 300 मीटर पर आठ–दस इंच गहरे गड्ढे हैं। रोजाना यहां से करीब 20 लाख रुपये टोल टैक्स लिया जा रहा है। दमोह–सागर (एसएच-63): पांच किमी हिस्से में जगह-जगह गड्ढे, फिर भी दो टोल नाकों से प्रतिदिन साढ़े छह लाख की वसूली की जाने की बात सामने आई है। इसी प्रकार शिवपुरी बायपास: दोनों आरओबी की 1–1 किमी एप्रोच रोड उखड़ी हुई, ट्रैफिक वन-वे चल रहा है, फिर भी रोजाना 20 लाख रुपये की वसूली की खबर है। बैतूल–इटारसी हाईवे: 72 किमी में से 20 किमी बदहाल, कोर्ट स्टे के कारण 21 किमी अधूरा, फिर भी कुंडी टोल नाका पर रोज 3 लाख की वसूली। रायसेन (एनएच-45): 2021 में बनी सड़क अब दरारों और गड्ढों से भरी, रोज 10 से 12 लाख रुपये वसूली। हरदा (एनएच-47): 700 करोड़ की लागत से बनी सड़क बनने के साथ ही उखड़ने लगी। आठ दिन पहले शुरू हुए टोल पर चार पहिया से 75 रुपये वसूले जा रहे हैं। 
    एनएचएआई अथार्टी का इस मामले में अपना ही तर्क है, वो नियमों में खरे उतरने की बात करते देखे जाते हैं, जबकि हकीकत यह है कि जिन सड़कों पर जगह-जगह गड्ढे और अधूरे काम हैं, वहां भी रोजाना करोड़ों की वसूली हो रही है। इसलिए सवाल उठाए जा रहे हैं कि जब सड़कें खुद टोल नाकों के पास ही बदहाल हैं, तब यात्रियों से पूरा टैक्स वसूलने का औचित्य क्या है? क्या यह सीधे-सीधे अदालत के आदेश की अवहेलना नहीं है? इस पर जिस तरह से टोल प्लाजा में बसूली की जाती है वह खुद अपने आप में सवालों के घेरे में है। 

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