मैहर। मैहर में वीआईपी दर्शन बंद थे। जनता लाइन में थी, मंत्री राधा सिंह सीधे गर्भगृह में। नियम सबके लिए बने थे, पर लागू कुछ पर ही हुए। लोकतंत्र मंदिर तक आया जरूर, पर अंदर जाते ही उसने जूते बदल लिए आम भक्त बाहर, खास अंदर। एसडीएम साहब का आदेश भी देखें! आप जिस घटना की बात कर रहे हैं, वह मां शारदा देवी मंदिर से जुड़ी है, जहां कथित तौर पर वीआईपी दर्शन बंद होने के बावजूद आम श्रद्धालु लंबी लाइन में खड़े रहे और राधा सिंह सीधे गर्भगृह में पहुंच गईं।
ऐसी घटनाएं अक्सर लोगों में नाराज़गी पैदा करती हैं क्योंकि
नियम सबके लिए समान होने चाहिए, खासकर धार्मिक स्थलों पर वीआईपी संस्कृति और आम जनता के बीच फर्क साफ दिखता है। इससे प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं धार्मिक स्थलों पर कई बार सुरक्षा, प्रोटोकॉल या भीड़ नियंत्रण के नाम पर वीआईपी एंट्री दी जाती है, लेकिन जब पहले से “वीआईपी दर्शन बंद” होने की बात कही जाए और फिर अपवाद दिखे, तो असंतोष होना स्वाभाविक है। अगर आप चाहें तो मैं इस घटना की पूरी पृष्ठभूमि, प्रशासन का पक्ष, और ऐसे मामलों में नियम क्या कहते हैं।


