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    मध्य प्रदेश के बरगी में नियमों की अनदेखी, एनजीटी आदेश के बावजूद चल रहा था जलविहार

    जबलपुर: बरगी बांध में गुरुवार शाम हुए दर्दनाक क्रूज हादसे ने अब एक बड़ा कानूनी और प्रशासनिक मोड़ ले लिया है। इस घटना में 6 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई अब भी लापता हैं। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, यह साफ होता जा रहा है कि यह सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि नियमों की घोर अनदेखी का नतीजा भी हो सकता है।

    NGT और सुप्रीम कोर्ट के आदेश की 'अवमानना' का आरोप

    हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल पर्यावरणीय कानूनों के उल्लंघन को लेकर उठ रहा है। पर्यावरणविद् सुभाष सी. पांडे के अनुसार, यह क्रूज संचालन सीधे तौर पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना है:

    • पेयजल स्रोतों पर प्रतिबंध: NGT ने 2023 में स्पष्ट आदेश दिया था कि नर्मदा नदी और भोपाल के बड़े तालाब जैसे पेयजल स्रोतों में डीजल से चलने वाली मोटराइज्ड नावों का संचालन नहीं किया जा सकता।

    • सुप्रीम कोर्ट की मुहर: मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन मार्च 2024 में सर्वोच्च अदालत ने NGT के फैसले को सही ठहराते हुए पर्यावरण संरक्षण के लिए इसे अनिवार्य बताया था।

    • वॉटर एक्ट 1974 का उल्लंघन: विशेषज्ञों का कहना है कि बरगी बांध का पानी 'बी श्रेणी' (पीने योग्य) है। जल (प्रदूषण की रोकथाम व नियंत्रण) कानून, 1974 के तहत ऐसी जल संरचनाओं में डीजल इंजन का उपयोग प्रतिबंधित है क्योंकि इनका धुआं और सल्फर जलीय जीवन को नष्ट कर पानी की गुणवत्ता खराब करते हैं।

    मौसम विभाग के 'येलो अलर्ट' को किया गया नजरअंदाज

    हादसे का दूसरा सबसे चौंकाने वाला पहलू प्रशासनिक लापरवाही है। मौसम विभाग ने पहले ही येलो अलर्ट जारी कर 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने की चेतावनी दी थी। सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुसार, ऐसे मौसम में बांध या नदी के भीतर क्रूज या नावों का संचालन तुरंत बंद कर देना चाहिए। इसके बावजूद 'नर्मदा क्वीन' को पर्यटकों के साथ पानी में उतारा गया, जो सीधे तौर पर यात्रियों की जान के साथ खिलवाड़ था।

    प्रशासनिक बचाव और विरोधाभास

    एक तरफ जहां पर्यावरणविद् इसे अदालत की अवमानना बता रहे हैं, वहीं पर्यटन विभाग के सचिव इलैयाराजा टी. का तर्क है कि NGT का प्रतिबंध केवल रामसर साइट्स (जैसे भोपाल की बड़ी झील) तक ही सीमित है। हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का मार्च 2024 का आदेश सभी प्रमुख पेयजल स्रोतों और बांधों पर लागू होता है।फिलहाल, बरगी बांध में रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है, लेकिन इस हादसे ने पर्यटन विकास निगम और जिला प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर दिया है। अब यह जांच का विषय है कि जब भोपाल में एनजीटी के आदेश पर क्रूज बंद कर दिए गए, तो बरगी में नियमों की धज्जियां क्यों उड़ाई जा रही थीं?

     

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