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    Homeदुनियारूस-यूक्रेन युद्ध तेज, ड्रोन हमले में वेयरहाउस और ऑयल डिपो तबाह

    रूस-यूक्रेन युद्ध तेज, ड्रोन हमले में वेयरहाउस और ऑयल डिपो तबाह

    मास्को। यूक्रेन द्वारा शनिवार तड़के रूस के विभिन्न क्षेत्रों पर किए गए भीषण ड्रोन हमलों ने भारी तबाही मचाई है। मास्को के दक्षिण-पूर्व में स्थित तांबोव क्षेत्र के कोटोव्स्क शहर में एक प्रमुख लॉजिस्टिक्स वेयरहाउस को निशाना बनाया गया, जिसमें सात कर्मचारियों की दुखद मृत्यु हो गई और लगभग 24 से 25 लोग घायल हो गए। यह हमला रूस की जानी-मानी ऑनलाइन रिटेल कंपनी के वेयरहाउस पर हुआ, जहाँ नाइट शिफ्ट के दौरान काम कर रहे कर्मचारी इसकी चपेट में आ गए। स्थानीय प्रशासन ने घटना की पुष्टि करते हुए राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए हैं।

    हवा में मार गिराए गए दर्जनों ड्रोन

    तांबोव के गवर्नर येवगेनी पेर्विशोव के अनुसार, रूसी वायु रक्षा प्रणालियों ने यूक्रेन द्वारा छोड़े गए 28 ड्रोन को अपने लक्ष्य तक पहुँचने से पहले ही मार गिराया। उन्होंने दावा किया कि यदि ये सभी ड्रोन अपने निशाने पर सटीक बैठते, तो नागरिक क्षति और जनहानि का आंकड़ा कहीं अधिक हो सकता था। वर्तमान में कोटोव्स्क स्थित वेयरहाउस में लगी आग पर पूरी तरह से काबू पा लिया गया है और सुरक्षा एजेंसियां स्थिति का बारीकी से आकलन कर रही हैं।

    तेल डिपो में लगी भीषण आग

    एक अन्य घटनाक्रम में, नोगिंस्क शहर स्थित एक तेल डिपो पर हुए ड्रोन हमले के मलबे के कारण वहां भीषण आग लग गई। मॉस्को क्षेत्र के गवर्नर आंद्रेई वोरोब्योव ने बताया कि इस घटना में दो लोग घायल हुए हैं। सुरक्षा के लिहाज से पास स्थित एक मैटरनिटी अस्पताल को तुरंत खाली करा लिया गया। यह डिपो पेट्रोल, डीजल और केरोसीन जैसे हल्के पेट्रोलियम उत्पादों के वितरण के लिए महत्वपूर्ण है। यहाँ कुल 24 स्टोरेज टैंक मौजूद हैं, जिनकी संयुक्त क्षमता लगभग 11,500 घन मीटर है, जिससे आग के प्रसार का खतरा बना हुआ था।

    बढ़ता तनाव और सुरक्षा चुनौतियां

    रूस के प्रमुख केंद्रों पर हुए ये ड्रोन हमले दोनों देशों के बीच जारी तनाव को और अधिक गंभीर बना रहे हैं। नागरिक प्रतिष्ठानों और ऊर्जा संसाधनों पर हो रहे इन हमलों से रूस की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। सरकारी अधिकारियों ने बताया है कि प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। हमले की तीव्रता और उसके बाद के घटनाक्रमों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह संघर्ष अब ऐसे मोड़ पर है जहाँ बुनियादी ढांचे और आपूर्ति केंद्रों को सीधे तौर पर निशाना बनाया जा रहा है।

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