अयोध्या: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे और दान की चोरी का मामला सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत पूरी तरह गरमा गई है। इस संवेदनशील प्रकरण में 'श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' की शिकायत पर पुलिस ने आठ नामजद आरोपियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है। वहीं दूसरी ओर, इस विवाद के बीच राम मंदिर को दान में मिले सोने-चांदी के आभूषणों की सुरक्षा को लेकर भी तीखे सवाल उठने लगे हैं। शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मंदिर ट्रस्ट पर सीधा हमला बोलते हुए दावा किया है कि शिवसेना द्वारा दान की गई 4 किलो चांदी की ईंट गायब है।
शिवसेना का बड़ा हमला: "उद्धव ठाकरे ने दी थी 4 किलो चांदी की ईंट, सालों बाद भी नहीं मिली रसीद"
सांसद संजय राउत ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर पोस्ट साझा करते हुए मंदिर प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उन्होंने लिखा, "अयोध्या में प्रभु श्री राम के मंदिर निर्माण के लिए शिवसेना की ओर से भेंट की गई 4 किलो चांदी की ईंट के गायब होने की बातें सामने आ रही हैं, जो बेहद चिंताजनक है।" राउत ने आगे कहा कि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने हजारों शिवसैनिकों और पूज्य संतों की गरिमामयी उपस्थिति में खुले दिल से 1 करोड़ रुपये की नकद राशि और एक पवित्र चांदी की ईंट समर्पित की थी। लेकिन विडंबना देखिए कि इतने साल बीत जाने के बाद भी ट्रस्ट की तरफ से इसकी कोई आधिकारिक रसीद या विवरण नहीं दिया गया है। उन्होंने मांग की है कि यह कीमती ईंट कहां है, इसकी पूरी पारदर्शिता के साथ जांच होनी चाहिए।
ट्रस्ट की तहरीर पर 8 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज, SIT की रिपोर्ट के बाद एक्शन
चढ़ावा चोरी के इस बड़े मामले में कानूनी कार्रवाई तेज हो गई है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्णमोहन की लिखित शिकायत (तहरीर) के आधार पर अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि थाने में आठ लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा पंजीकृत किया गया है। पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, अनुकल्प मिश्र, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, लवकुश मिश्र, रमाशंकर मिश्र, सुभाष श्रीवास्तव और मनीष कुमार यादव को आरोपी बनाया गया है। इसके अलावा कुछ अज्ञात लोगों के नाम भी शामिल हैं। विशेष जांच दल (SIT) द्वारा सरकार को सौंपी गई शुरुआती रिपोर्ट में की गई सख्त सिफारिशों के बाद इन आरोपियों को पुलिस हिरासत में ले लिया गया है और उनसे गहन पूछताछ की जा रही है।
सीएम योगी आदित्यनाथ के आदेश पर गठित हुई थी एसआईटी, बोले- दोषी बख्शे नहीं जाएंगे
राम मंदिर जैसे आस्था के बड़े केंद्र में दान राशि और चढ़ावे में हेराफेरी की भनक लगते ही मंदिर ट्रस्ट ने राज्य सरकार से एक उच्च स्तरीय और विशेष जांच की मांग की थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तुरंत संज्ञान लिया और इस पूरे घपले के पर्दाफाश के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) के गठन की मंजूरी दी थी।
मुख्यमंत्री कार्यालय का आधिकारिक बयान: राज्य सरकार द्वारा जारी सूचना के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दोटूक शब्दों में कहा है कि इस पूरे प्रकरण में एसआईटी की जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होगी, जिससे 'दूध का दूध और पानी का पानी' साफ हो जाएगा। प्रभु राम के दरबार में ऐसी धांधली करने वाले किसी भी दोषी को कतई बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ ऐसी कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाएगी जो मिसाल बनेगी।
फिलहाल, पुलिस और एसआईटी की टीमें पकड़े गए आरोपियों के बैंक खातों, मंदिर के सीसीटीवी कैमरों और दान के रिकॉर्ड खंगालने में जुटी हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह चोरी कब से चल रही थी और इसमें कितने लाख या करोड़ रुपये का गबन हुआ है।


