More
    Homeराजनीतिकोलाथुर चुनाव नतीजे पर स्टालिन को झटका! VVPAT पर्चियों की पूरी गिनती...

    कोलाथुर चुनाव नतीजे पर स्टालिन को झटका! VVPAT पर्चियों की पूरी गिनती से HC का इनकार

    चेन्नई: तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एवं डीएमके (DMK) प्रमुख एमके स्टालिन को मद्रास उच्च न्यायालय से बड़ा न्यायिक झटका लगा है। अदालत ने कोलाथुर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र की 100 प्रतिशत वीवीपीएटी (VVPAT) पर्चियों की दोबारा गिनती कराए जाने संबंधी उनकी याचिका को निरस्त कर दिया है।

    उल्लेखनीय है कि 2026 के विधानसभा चुनाव में स्टालिन को उनके पारंपरिक गढ़ कोलाथुर से टीवीके (TVK) के प्रत्याशी वीएस बाबू ने पराजित किया था। इस परिणाम के पश्चात स्टालिन ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) में गड़बड़ी और तकनीकी खामियों का आरोप लगाते हुए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।

    सभी 286 ईवीएम मशीनों के सत्यापन की थी मांग

    स्टालिन ने अपनी याचिका में वीएस बाबू के निर्वाचन को अमान्य घोषित करने तथा स्वयं को उस क्षेत्र से विजयी घोषित करने का आग्रह किया था। इसके साथ ही उन्होंने अदालत से भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) को यह निर्देश देने की मांग की थी कि चुनाव में प्रयुक्त सभी 286 ईवीएम से संबद्ध वीवीपीएटी पर्चियों का शत-प्रतिशत मिलान और मशीनों का तकनीकी परीक्षण कराया जाए।

    मद्रास हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी तथा न्यायमूर्ति जी अरुल मुरुगन की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए इसे पोषणीय (सुनवाई योग्य) न मानते हुए खारिज कर दिया।

    निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया और विलंब पर उठाए सवाल

    याचिका में स्टालिन का पक्ष था कि परिणाम घोषित होने के तत्काल बाद, 7 मई को ही उन्होंने ईवीएम की जांच हेतु आवेदन दे दिया था। इसके बावजूद निर्वाचन आयोग ने 45 दिनों के अनुचित विलंब के पश्चात 29 जुलाई से सत्यापन प्रक्रिया प्रारंभ की।

    उन्होंने उल्लेख किया कि न्यायिक दिशा-निर्देशों के अनुसार कुल इस्तेमाल की गई मशीनों में से 5 प्रतिशत यानी 14 ईवीएम की जांच होनी थी। परंतु प्रथम चरण में चुनी गई चार में से तीन मशीनों ने काम करना बंद कर दिया। तत्पश्चात चयनित अन्य चार मशीनों में से भी एक मशीन निष्क्रय पाई गई।

    स्टालिन का तर्क था कि आयोग स्तर पर हुए 45 दिनों के विलंब के कारण वे निर्धारित समयावधि में चुनावी याचिका प्रस्तुत नहीं कर सके थे, इसलिए इस विशिष्ट मामले में संविधान के अनुच्छेद 329 के अंतर्गत लगने वाले प्रतिबंध को शिथिल किया जाना चाहिए।

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here