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    Shani Jayanti 2026: साल 2026 में कब है शनि जयंती? नोट कर लें सही तिथि और शुभ मु‍हूर्त

    Shani Jayanti 2026: हिंदू धर्म में शनि जयंती का एक अलग अपना महत्व होता है. हिंदू कैलेंडर के अनुसार, ज्येष्ठ माह की अमावस्‍या की तिथि को शनि जयंती का पर्व मनाया जाता है. हिंदू मान्‍यताओं के मुताबिक इस दिन सूर्यदेव और छाया पुत्र शनिदेव का जन्‍म हुआ था. शनि को न्‍याय के देवता, कर्मफल दाता शनि देव की विधिवत पूजा की जाती है. इसके साथ ही व्रत रखने का भी विधान है. मान्‍यता है कि शनि देव जातकों को उनके कर्मों के हिसाब से फल देते है, इसलिए मनुष्‍य जीवन में अच्‍छे कर्म करने चाहिए. कहा जाता है कि न्‍याय के देवता शनि की दृष्टि एक बार तो जीवन में अवश्‍य पड़ती ही है.

    जातकों को शनि के साढ़े साती और ढैय्या का भी सामना करना पड़ता है. आपको बता दें कि शनि जयंती का पर्व उत्तर भारत में ज्येष्ठ अमावस्‍या को मनाया जाता है, तो वहीं दक्षिण भारत में वैशाख अमावस्‍या के दिन इस पर्व काे धुमधाम से मनाया जाता है. आइए जानते हैं कि इस साल ज्येष्ठ माह में पड़ने वाली शनि जयंती की सही तिथि क्‍या है और पूजा का शुभ मुहूर्त क्‍या रहेगा.

    क्‍या है शनि जंयती की सही तिथि?
    साल में दो बार शनि जयंती आती है. उत्तर भारत में शनि जयंती ज्येष्ठ अमावस्‍या को मनाई जाती है जा इस साल 16 मई को पड़ रही है. वहीं दक्षिण भारत में शनि जयंती वैशाख अमावस्‍या की तिथि को मनाई जाती है. धार्मिक मान्‍यताओं में ज्येष्ठ अमावस्‍या को आने वाली शनि जयंती का महत्व अधिक होता है. मान्‍यता है कि इस दिन सूर्यदेव और छाया पुत्र शनिदेव का जन्‍म हुआ था.
    शनि जयंती का शुभ मुहूर्त
    16 मई 2026 ज्येष्ठ अमावस्‍या के दिन पड़ने वाली शनि जयंती सुबह 5:11 बजे शुरू होगी और अगले दिन 17 मई 2026 को सुबह 1:30 बजे इसका समापन होगा. शनि देव की विशेष पूजा के लिए हिंदू पंचांग के अनुसार, शुभ मुहूर्त 7:05 बजे से रात 8:23 बजे तक रहेगा.
    शनि जयंती के दिन क्‍या करना चाहिए
    शनि जयंती के शुभ अवसर पर सबसे खास अनुष्ठानों में शनि देव को तैलाभिषेकम और शनि शान्ति पूजा की जाती है. इसको करने से व्‍यक्ति के जीवन में शनि की कृपा बनी रहती है.
    शनि जयंती के दिन सुबह स्‍न्नान ध्‍यान आदि करना चाहिए और इसके बाद पीपल की में कच्‍चा दूध, गंगाजल और साफ जल को चढ़ाया जाना चाहिए. साथ ही 11 बार परिक्रमा भी करें.
    शनि पूजा के दौरान ऊं शं शनैश्चराय नमः मंत्र का 108 बार जाप करें.
    शनि जयंती के दिन शनि देव का नाम लेते हुए लोहा, जामुन, काला तिल, काले जूते, तेल आदि का दान करें.
    शनि जयंती पर किन लोगों को मिलता है शनि देव का आशीष
    भगवान शनि देव को निष्पक्ष न्‍याय के देव के रूप में पूजा जाता है. शनि देव सभी जातकों के साथ निष्‍पक्ष न्‍याय करते हैं और अपने भक्तों को सौभाग्‍य और समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं. जिन लोगों पर भगवान शनि का आशीर्वाद नहीं होता, उन्‍हें जीवन में बहुत ही ज्यादा परिश्रम करना पड़ता है और किसी भी प्रकार की सफलता असानी से नहीं मिलती, कड़ी मेहनत करनी पड़ती है.
    शनि देव किन लोगों से होते हैं नाराज
    भगवान शनि देव गरीब, लाचार और असहाय लोगों को प्रताड़‍ित करने वाले लोगों से शनि देव कभी भी खुश नहीं होते हैं. ऐसे व्‍यक्ति के जीवन में जब भी शनि देव की दशा आती है तो उसे शारीरिक, मानसिक और आर्थिक कष्टों का सामना करना पड़ता है. शनि देव की मार उस व्‍यक्ति को पड़ती है. सबसे ज्यादा शराब, जुआ, चोरी, हत्या और अन्‍य तामसिक प्रवृत्त‍ि में लिप्‍त हुए लोगों को शनि देव का प्रकोप सहना पड़ता है.
     

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