More
    Homeदेशशशि थरूर और मनीष तिवारी को मिला कांग्रेसी नेता का साथ

    शशि थरूर और मनीष तिवारी को मिला कांग्रेसी नेता का साथ

    नई दिल्ली|होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बने तनाव के बीच कांग्रेस के भीतर एक और ऐसा बयान सामने आया है, जिसने पार्टी की राजनीतिक लाइन पर नई चर्चा छेड़ दी है। शशि थरूर और मनीष तिवारी के बाद अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने भी भारत सरकार की कूटनीतिक नीति का खुलकर समर्थन किया है। आनंद शर्मा ने कहा कि इस संकट के समय भारत के राजनयिक, दूतावास और अधिकारी बहुत मेहनत से काम कर रहे हैं और उनकी कोशिशों को राजनीतिक नजर से नहीं देखना चाहिए। उन्होंने साफ कहा कि इस तरह के संवेदनशील मुद्दे पर दलगत राजनीति करना देशहित के खिलाफ होगा।

    आनंद शर्मा ने कहा कि भारत ने होर्मुज संकट को अब तक संतुलित और समझदारी भरे तरीके से संभाला है। उनके मुताबिक भारत उन गिने-चुने देशों में है, जहां सबसे अधिक जहाज या तो सुरक्षित निकल पाए हैं या उन्हें भारत की ओर मोड़ दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि अब तक भारतीय प्रवासी पूरी तरह सुरक्षित हैं। शर्मा ने जोर देकर कहा कि ऐसे संकट में देश के भीतर राष्ट्रीय सहमति और एकजुटता जरूरी होती है। उनका कहना था कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन जब देश, नागरिकों और विदेशों में काम कर रहे भारतीय अधिकारियों की बात हो, तब पूरे राजनीतिक नेतृत्व को एक सुर में बोलना चाहिए।

    क्या आनंद शर्मा ने सरकार की कूटनीति को खुला समर्थन दिया?

    आनंद शर्मा के बयान में सरकार के रुख की साफ सराहना दिखी। उन्होंने कहा कि भारत के राजनयिक तिरंगे को ऊंचा रखे हुए हैं और वे देश के लोगों के लिए काम कर रहे हैं। ऐसे में उनका हौसला बढ़ाया जाना चाहिए। शर्मा ने कहा कि भारत इस संकट में न किसी एक तरफ झुका है और न ही किसी के दबाव में आया है। उन्होंने इसे कुशल कूटनीति बताया। उनका कहना था कि यही वजह है कि भारत अब तक अपने लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित कर पाया है। उन्होंने माना कि इस समय सबसे बड़ी जिम्मेदारी यह है कि विदेशों में रह रहे भारतीय सुरक्षित रहें और भारत की साख भी बनी रहे।

    क्या पार्टी लाइन से अलग बयान पर कांग्रेस के भीतर सवाल उठे?

    आनंद शर्मा से जब यह पूछा गया कि क्या उनका बयान कांग्रेस की तय लाइन से अलग है, तो उन्होंने उलटा सवाल किया कि आखिर पार्टी लाइन है क्या। उन्होंने कहा कि किसी एक व्यक्ति के बयान को पार्टी लाइन नहीं माना जा सकता। शर्मा ने सुझाव दिया कि कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक होनी चाहिए और वहीं चर्चा के बाद पार्टी का आधिकारिक रुख तय होना चाहिए। इस बयान से साफ संकेत मिला कि पश्चिम एशिया और होर्मुज जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर कांग्रेस के भीतर भी अलग-अलग सोच मौजूद है। साथ ही यह भी जाहिर हुआ कि पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता ऐसे मामलों में सरकार के खिलाफ सीधी टकराव वाली राजनीति के पक्ष में नहीं हैं।

    क्या सरकार को विपक्ष के साथ संवाद और बढ़ाना चाहिए?

    आनंद शर्मा ने यह भी कहा कि सरकार ने ऑल पार्टी मीटिंग की है, लेकिन इसे और मजबूत बनाने की जरूरत है। उनके मुताबिक यह संवाद एक बार की औपचारिकता बनकर नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे लगातार जारी रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हित में सरकार और विपक्ष के बीच भरोसे का माहौल जरूरी है। ऐसे संकट में देश को एकजुट दिखना चाहिए। शर्मा ने यह भी साफ किया कि सरकार के पास ज्यादा जानकारी होती है, क्योंकि वही अंतरराष्ट्रीय नेताओं और दूसरे देशों के साथ सीधे संपर्क में होती है। इसलिए कुछ फैसले वही बेहतर तरीके से ले सकती है। उनका कहना था कि नई दिल्ली दुनिया की बड़ी राजधानियों से संपर्क में है और यह प्रक्रिया जारी रहनी चाहिए।

    क्या होर्मुज संकट में भारत की प्राथमिकता सिर्फ भारतीयों की सुरक्षा है?

    आनंद शर्मा के पूरे बयान का सबसे बड़ा संदेश यही रहा कि इस संकट में भारत की पहली चिंता अपने नागरिकों, प्रवासियों और समुद्री हितों की सुरक्षा है। उन्होंने कहा कि भारत का संतुलित रुख इसलिए जरूरी है, क्योंकि उसे किसी खेमे में खड़े होने के बजाय अपने राष्ट्रीय हित को देखना है। यही कारण है कि उन्होंने राजनीतिक बहस से ऊपर उठकर राष्ट्रीय एकता की बात की। उनके बयान ने यह भी दिखाया कि कांग्रेस के भीतर ऐसे नेता मौजूद हैं, जो विदेश नीति जैसे मामलों में सरकार के अच्छे कदमों को स्वीकार करने में हिचक नहीं रखते। शशि थरूर और मनीष तिवारी के बाद आनंद शर्मा का यह बयान उसी कड़ी का नया संकेत माना जा रहा है।

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here