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    कर्नाटक सीएम के इस्तीफे पर शिवसेना (UBT) की प्रतिक्रिया: संजय राउत बोले- ‘कुर्सी छोड़ना आसान नहीं, लेकिन यह कांग्रेस का अंदरूनी मामला’

    मुंबई | कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। महाविकास अघाड़ी (MVA) के घटक दल शिवसेना (यूबीटी) ने सिद्धारमैया के इस फैसले का पुरजोर स्वागत किया है। पार्टी के कद्दावर नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने महाराष्ट्र की राजनीति के परिदृश्य से इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी पैनी प्रतिक्रिया दी है। राउत के इस बयान को आगामी महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों और दोनों राज्यों के सीमा विवाद के बीच बेहद अहम माना जा रहा है।

    संजय राउत ने की सिद्धारमैया के कदम की सराहना, महाराष्ट्र के लिए बताया मिसाल

    शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने मुंबई में मीडिया से मुखातिब होते हुए सिद्धारमैया के फैसले को भारतीय लोकतंत्र के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण बताया। राउत ने स्पष्ट रूप से कहा कि मुख्यमंत्री की कुर्सी इतनी सहजता और बिना किसी आंतरिक कलह के छोड़ देना आज के दौर की राजनीति में लगभग असंभव सा दिखता है। राउत के मुताबिक, इस गरिमापूर्ण सत्ता हस्तांतरण के बाद उनके मन में सिद्धारमैया के प्रति आदर और सम्मान बहुत ज्यादा बढ़ गया है।

    'कुर्सी के मोह' पर संजय राउत का तीखा तंज

    महाराष्ट्र की मौजूदा राजनीतिक स्थिति से इस घटनाक्रम को जोड़ते हुए संजय राउत ने एक बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है। उन्होंने कहा, "आज देश और विशेषकर महाराष्ट्र में जिस तरह सत्ता के लिए खींचतान और जोड़-तोड़ की राजनीति देखने को मिलती है, उसके विपरीत सिद्धारमैया ने पार्टी अनुशासन को सर्वोपरि रखा।" राउत का यह बयान सीधे तौर पर महाराष्ट्र के मौजूदा शासक दल और उन नेताओं पर एक परोक्ष हमला माना जा रहा है जिन पर विपक्ष लगातार 'कुर्सी के मोह' का आरोप लगाता रहा है।

    पार्टी आलाकमान के निर्देश और अनुशासन की जीत

    इस्तीफा देने के बाद स्वयं सिद्धारमैया ने भी यह साफ कर दिया था कि वे पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व (आलाकमान) के आदेश का पालन कर रहे हैं। कांग्रेस आलाकमान ने उन्हें दो दिन पहले ही पद छोड़ने का निर्देश दिया था, जिसका सम्मान करते हुए उन्होंने अपना त्यागपत्र राज्यपाल को सौंप दिया। महाराष्ट्र के राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संजय राउत द्वारा सिद्धारमैया के इस बयान और फैसले को इतनी प्रमुखता देना, महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी (MVA) के भीतर भविष्य में होने वाले गठबंधन और सामूहिक निर्णयों के लिए एक सकारात्मक संकेत देने की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।

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