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    US महंगाई आंकड़ों से पहले चांदी को बढ़त, एमसीएक्स पर 1.5% की तेजी

    नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी मुद्रा (डॉलर) में आई गिरावट के चलते भारतीय बाजारों में आज चांदी और सोने की कीमतों में जबरदस्त तेजी दर्ज की गई। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अस्थिरता और मिडिल ईस्ट के बिगड़ते हालातों ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश के लिए कीमती धातुओं की ओर आकर्षित किया है। मंगलवार को भारतीय बाजार (MCX) पर चांदी की कीमतें 1.5% की बढ़त के साथ ₹2,82,463 प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गईं, जबकि सोना भी 0.3% चढ़कर ₹1,54,150 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा है।

    1. वैश्विक संघर्ष और कच्चे तेल की सप्लाई का असर

    दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल शिपिंग मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की चिंता बढ़ा दी है। ईरान और अमेरिका के बीच जारी जुबानी जंग और शांति प्रस्तावों पर असहमति के कारण ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने का खतरा पैदा हो गया है। इसके चलते कच्चे तेल के दाम बढ़े हैं, जिससे भविष्य में महंगाई और तेज होने की आशंका है। इसी अनिश्चितता के माहौल में ट्रेडर्स अब डॉलर के मुकाबले सोने और चांदी को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं।

    2. कमजोर डॉलर और बॉन्ड यील्ड में गिरावट से मिला सहारा

    अमेरिकी डॉलर की मजबूती में कमी और बॉन्ड यील्ड के गिरने से बुलियन मार्केट (सोना-चांदी) को अतिरिक्त मजबूती मिली है। आमतौर पर जब डॉलर कमजोर होता है, तो विदेशी खरीदारों के लिए सोना-चांदी खरीदना सस्ता हो जाता है, जिससे इनकी मांग बढ़ जाती है। साथ ही, निवेशक अब अमेरिकी कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) के आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं, जिससे फेडरल रिजर्व के भविष्य के ब्याज दरों की दिशा तय होगी।

    3. भविष्य का अनुमान: क्या जारी रहेगी यह तेजी?

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कीमतों में आई यह तेजी फिलहाल एक सीमित दायरे में रह सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, चांदी वर्तमान में अपनी ऊपरी सीमा को छू चुकी है और जल्द ही इसमें कुछ सुधार (Correction) देखा जा सकता है। सोने के लिए भी यही अनुमान लगाया जा रहा है कि पिछले हफ्ते के उच्चतम स्तर को छूने के बाद अब बाजार में मुनाफावसूली (Profit-booking) हावी हो सकती है, जिससे कीमतें वापस निचले स्तरों की ओर आ सकती हैं। इसके अलावा, ट्रंप और शी जिनपिंग की आगामी बैठक के नतीजों पर भी बाजार की पैनी नजर रहेगी।

     

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