केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में दर्ज की गई 7.8 प्रतिशत की आर्थिक विकास दर (GDP Growth) पर संतोष व्यक्त करते हुए इसे पूरे वर्ष के लिए एक अत्यंत सकारात्मक संकेत बताया है। उन्होंने रेखांकित किया कि गंभीर वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी देश के विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों में मजबूत विस्तार देखने को मिल रहा है।
वैश्विक मंच पर भारतीय अर्थव्यवस्था की सराहना
एक वीडियो संदेश के माध्यम से वित्त मंत्री ने बताया कि अमेरिका के उत्तरी कैरोलिना स्थित ऐशविले में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने भारत के इस आर्थिक प्रदर्शन की मुक्तकंठ से सराहना की है। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से उभरती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर चुका है।
प्रमुख सेक्टर्स के विस्तार पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया:
विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) क्षेत्र: 9.2 प्रतिशत की शानदार वृद्धि दर।
वित्तीय एवं पेशेवर सेवाएं: 12.1 प्रतिशत की उल्लेखनीय बढ़त।
विदेशी मुद्रा भंडार 700 अरब डॉलर के पार
वित्त मंत्री ने देश की वित्तीय स्थिरता का उल्लेख करते हुए बताया कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 700 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक के स्तर पर बना हुआ है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पहली तिमाही में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही, जो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा पूर्व में लगाए गए 7 प्रतिशत के अनुमान से काफी बेहतर है।
जीडीपी आंकड़े और आर्थिक अनुमान
जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार देश का आर्थिक परिदृश्य इस प्रकार रहा:
वास्तविक जीडीपी: वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में वास्तविक जीडीपी 81.36 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 75.46 लाख करोड़ रुपये थी।
नॉमिनल जीडीपी: नॉमिनल जीडीपी 10.3 प्रतिशत की दर से बढ़कर 88.27 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई है, जो बीते वर्ष 80 लाख करोड़ रुपये थी।
आरबीआई का वार्षिक अनुमान: केंद्रीय बैंक ने पूरे वित्तीय वर्ष के लिए विकास दर 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है।
2047 के विकसित भारत के विजन पर जोर
वित्त मंत्री ने कहा कि ये सकारात्मक नतीजे देश के 140 करोड़ नागरिकों के कठोर परिश्रम और नीतिगत सुधारों का प्रतिफल हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 'विकसित भारत 2047' के संकल्प की दिशा में देश की तेज प्रगति की सराहना की। इससे पूर्व प्रधानमंत्री ने भी विपरीत वैश्विक परिस्थितियों और टूटी हुई सप्लाई चेन के बीच इस आर्थिक सफलता के लिए देशवासियों को बधाई दी थी।


