मुंबई। महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर बड़ा भूचाल आने के संकेत मिल रहे हैं। ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बाद अब उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना (UBT) में बड़ी बगावत की खबरें गर्म हैं। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा काफी तेज है कि उद्धव गुट के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के संपर्क में हैं और वे जल्द ही शिंदे गुट की शिवसेना में शामिल हो सकते हैं।
कहा जा रहा है कि बागी रुख अपनाने वाले सांसदों में संजय दिना पाटिल, संजय देशमुख, नागेश पाटिल अष्टीकर, ओमराजे नाइक निंबालकर, संजय जाधव और भाऊसाहेब वाकचौरे का नाम शामिल है। दूसरी तरफ, अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे जैसे वरिष्ठ नेता अब भी उद्धव ठाकरे के साथ डटे हुए हैं।
देश की राजधानी दिल्ली में भी बढ़ेगा शिंदे गुट का दबदबा
अगर उद्धव ठाकरे गुट के ये 6 सांसद पाला बदलकर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के खेमे में शामिल होते हैं, तो लोकसभा में शिंदे गुट के सांसदों की कुल संख्या बढ़कर 13 हो जाएगी। इस आंकड़े के साथ वे महाराष्ट्र से सबसे बड़े संसदीय दलों में से एक बनकर उभरेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस उठापटक का असर सिर्फ महाराष्ट्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका बड़ा प्रभाव राष्ट्रीय राजनीति पर भी देखने को मिलेगा, क्योंकि केंद्र में सत्तारूढ़ एनडीए (NDA) लगातार संसद में अपनी संख्याबल को और मजबूत करने की कोशिशों में जुटा है।
मोदी कैबिनेट में बढ़ सकती है हिस्सेदारी और बार्गेनिंग पावर
उद्धव गुट के सांसदों के इस संभावित विलय से मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की बार्गेनिंग पावर (सौदेबाजी की क्षमता) में भारी इजाफा होने की उम्मीद है। देश में इस समय मोदी कैबिनेट के विस्तार और फेरबदल को लेकर चर्चाएं जोरों पर हैं। ऐसे माहौल में राजनीतिक गलियारों में कयास लगाए जा रहे हैं कि सांसदों की संख्या बढ़ने के बाद शिंदे गुट को केंद्रीय कैबिनेट में नई जगह और कई महत्वपूर्ण मंत्रालय मिल सकते हैं। इसके साथ ही महाराष्ट्र की राज्य सरकार में भी शिंदे गुट को और ज्यादा रसूखदार और प्रभावशाली विभाग सौंपे जाने की संभावना बढ़ गई है।
सांसदों के बाद अब विधायकों पर भी पाला बदलने का मंडराया खतरा
सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स से जो खबरें आ रही हैं, वे उद्धव ठाकरे की मुश्किलें और बढ़ाने वाली हैं। बताया जा रहा है कि लोकसभा सांसदों के इस कदम के बाद उद्धव गुट के विधायकों में भी असंतोष पनप रहा है और वे भी अलग राह चुन सकते हैं। चर्चा है कि महाराष्ट्र विधानसभा में उद्धव ठाकरे गुट के कुल 20 विधायकों में से करीब 14 विधायक पाला बदलने की तैयारी में हैं।
इस पूरे घटनाक्रम पर शिवसेना के एक वरिष्ठ नेता ने टिप्पणी करते हुए कहा कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद कई विरोधियों ने एकनाथ शिंदे को कम आंकना शुरू कर दिया था। लेकिन शिंदे ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि जब लोग यह मान लेते हैं कि खेल खत्म हो चुका है, तब भी वह बाजी पलटना अच्छी तरह जानते हैं। उन्होंने बेहद सटीक और शानदार राजनीतिक चाल चली है।
लोकसभा में नीतीश कुमार की जेडीयू को पछाड़ देगा शिंदे गुट
संसद के समीकरणों की बात करें तो वर्तमान में लोकसभा में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू (JDU) के पास 12 सांसद हैं, जो सदन में छठी सबसे बड़ी पार्टी है और एनडीए गठबंधन के भीतर तीसरा सबसे बड़ा दल है। वहीं, फिलहाल एकनाथ शिंदे की शिवसेना के पास 7 लोकसभा सांसद हैं। यदि उद्धव गुट के 6 बागी सांसद उनके साथ आ जाते हैं, तो शिंदे की पार्टी के सांसदों की संख्या बढ़कर 13 हो जाएगी। इस तरह वह लोकसभा में जेडीयू से आगे निकल जाएगी और सदन में उसकी स्थिति और ज्यादा मजबूत हो जाएगी।


