नई दिल्ली। विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अब राज्यों को अपने स्तर पर प्रगति के पांच प्रमुख मानक निर्धारित करने होंगे। देश के सभी राज्यों ने इस दिशा में अपने-अपने खाके तैयार करने की प्रक्रिया आरंभ कर दी है। इस योजना में धरातल पर कार्यरत प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ युवाओं के सुझावों को भी प्राथमिकता दी जा रही है।
मुख्य सचिवों के आगामी सम्मेलन में बनेगी रणनीति
देश भर के राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों यानी मुख्य सचिवों की आगामी माह आयोजित होने वाली उच्चस्तरीय बैठक में इस पूरे विषय पर गहन चिंतन-मनन किया जाएगा। इस बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष राज्यों के भावी एजेंडे और नई रणनीतियों को प्रस्तुत किया जाएगा। इस सम्मेलन की सबसे खास बात यह होगी कि इसमें केवल नीतियों के निर्माण के बजाय उनके वास्तविक परिणामों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
परिणाम आधारित कार्यशैली और प्रशासनिक जवाबदेही पर जोर
केंद्र और राज्यों के बीच आपसी समन्वय को सुदृढ़ करने के साथ-साथ प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ाने तथा परिणाम आधारित कार्यसंस्कृति को बढ़ावा देने पर मुख्य रूप से चर्चा होगी। विकसित भारत-2047 के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए प्रशासनिक सुधारों, सहयोगात्मक संघवाद और राज्यों की जवाबदेही को एक एकीकृत ढांचे में पिरोया जा रहा है। इसके अंतर्गत प्रत्येक राज्य अपनी प्राथमिकताओं के आधार पर विकास के पांच विशिष्ट क्षेत्रों का चयन करेगा।
आधारभूत ढांचे और नागरिक सेवाओं से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे
इस महत्वपूर्ण बैठक में खनन और कोयला जैसे प्राकृतिक संसाधनों के कुशल उपयोग की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। इसके अतिरिक्त जैव प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी तथा विज्ञान व तकनीक के प्रभावी प्रयोग से प्रशासनिक सेवाओं को नागरिकों के लिए अधिक सुलभ और सहज बनाने पर विचार-विमर्श होगा। साथ ही सड़क, रेल और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को निर्धारित समयावधि में पूरा करने के मार्ग में आने वाली बाधाओं को दूर करने के उपाय भी खोजे जाएंगे।


