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    Homeराज्यमध्यप्रदेशभारतीय कला-संस्कृति को विश्व पटल पर दें नई ऊँचाई : राज्यपाल पटेल

    भारतीय कला-संस्कृति को विश्व पटल पर दें नई ऊँचाई : राज्यपाल पटेल

    भोपाल : राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने विद्यार्थियों से आह्वान किया है कि वे भारत की गौरवशाली कला, संस्कृति और संगीत को विश्व पटल पर नई ऊँचाईयों तक ले जाने के लिए संकल्पित हों। दीक्षांत समारोह, भावी जीवन के लिए गौरव, सम्मान और आत्म-विश्वास के साथ राष्ट्र-समाज के प्रति कर्तव्यों के लिए प्रतिबद्धता का संकल्प लेने का समय होता है। उन्होंने कहा कि समारोह में प्रदान की गई कला एवं संगीत की उपाधि, उनकी प्रतिभा का प्रमाण है। कला और संगीत से समाज एवं राष्ट्र की सेवा का संकल्प पत्र भी है। राज्यपाल पटेल शुक्रवार को ग्वालियर में राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय के सप्तम दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक एवं उपाधियां प्रदान की। सभी को बधाई एवं शुभकामनायें भी दीं। दीक्षांत समारोह का आयोजन, राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर के दत्तोपंत ठेंगड़ी सभागार में हुआ।

    राष्ट्र-समाज की नींव का आधार कला एवं संस्कृति

    राज्यपाल पटेल ने कहा कि भारतीय शास्त्रीय संगीत, केवल मनोरंजन का साधन मात्र नहीं है, बल्कि यह धर्म और अध्यात्म से जुड़कर व्यक्ति के तन-मन और आत्मा को निर्मल भी करता है। कला, संस्कृति समाज एवं राष्ट्र की नींव का आधार है। इनकी मजबूती के बिना किसी भी राष्ट्र का विकास अधूरा होता है। उन्होंने कहा कि युवा शक्ति की कला साधना, सतत प्रयास और योगदान से ही भारत का वास्तविक सांस्कृतिक उत्थान होगा। उन्होंने नई पीढ़ी से आह्वान किया कि संगीत और कला के क्षेत्र में शोध, नवाचार और अनुसंधान के लिये आगे आए। भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र और विश्व गुरू बनाने में योगदान दें।

    संस्कृति की संवेदना से होती शिक्षा शोभायमान

    राज्यपाल पटेल ने कहा कि शिक्षा तभी शोभायमान होती है, जब उसमें संस्कृति की संवेदना शामिल हो। विद्यार्थी अपने ज्ञान और गुणों से दूरस्थ, ग्रामीण, गरीब, वंचित और प्रतिभावान बच्चों के उत्थान में सहयोग करें। उन्होंने कहा कि तकनीकी प्रगति के साथ विलुप्त हो रहे लोक संगीत और कलाओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिये चिंतन करना अत्यंत जरूरी है। राज्यपाल पटेल ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने विश्वविद्यालय की दीक्षांत स्मारिका का लोकार्पण भी किया।

    संस्कृति, पर्यटन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र सिंह लोधी ने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि संकल्पबद्ध होकर देश के सुखद भविष्य के निर्माण में अपना योगदान दें। आधुनिक बनें पर अपनी जड़ों से जुड़े रहें। मनुष्य को मनुष्य से जोड़ने वाले मानवीय मूल्यों को हमेशा आगे बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार भारतीय कला, संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है। राज्यमंत्री लोधी ने कहा भारत की संस्कृति सदैव कला, संगीत की पोषक रही है। हमारी संस्कृति में नाद को ब्रह्म की संज्ञा दी गई है।

    शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव अतुल कोठारी ने कहा कि विद्यार्थी अपने भीतर हमेशा सीखने की भावना जागृत रखें। अपने चरित्र को मजबूत रखें, क्योंकि चरित्र ही व्यक्ति की वास्तविक पहचान होता है।

    विश्वविद्यालय की कुलगुरू प्रो. स्मिता सहस्त्रबुद्धे ने दीक्षांत उपदेश दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को संकल्प दिलाया कि ज्ञान का उपयोग “सर्वजन हिताय-सर्वजन सुखाय” के लिये करें। आभार कुलसचिव डॉ. आशुतोष खरे ने माना।

    समारोह में प्रख्यात शास्त्रीय संगीत गायक पं. अजय पोहनकर ने भजन एवं ठुमरी की मनमोहक प्रस्तुति दी। उन्होंने ''गोविंद जय जय-गोपाल जय जय'' भजन और “कैसी ये भलाई कन्हाई – पनिया भरन मोरि गगरि गिराई” गाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। समारोह में विश्वविद्यालय की छात्राओं ने भरतनाट्यम, विश्वविद्यालय का कुलगीत और शक्ति आराधना की प्रस्तुति दी।

    कार्यक्रम में राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रो. अरविंद कुमार शुक्ला, जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रो. दिवाकर सिंह राजपूत, राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय के पूर्व कुलगुरू प्रो. साहित्य कुमार नाहर सहित विश्वविद्यालय के समस्त अचार्यगण, संगीतकार, छात्र-छात्राएं एवं उनके परिजन उपस्थित थे।

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