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    Homeराज्यछत्तीसगढ़अंबिकापुर में आग की घटना के बाद निगम ने सख्त रुख अपनाया

    अंबिकापुर में आग की घटना के बाद निगम ने सख्त रुख अपनाया

    अंबिकापुर अग्निकांड: सामान्य सभा में हंगामा, अवैध पटाखा और गैस गोदामों की जांच के लिए बनी 'स्पेशल कमेटी'

    अंबिकापुर| अंबिकापुर के राम मंदिर रोड स्थित एक रिहायशी इमारत में संचालित अवैध पटाखा गोदाम में लगी आग ने 15 घंटे तक शहर को दहशत में रखा। इस गंभीर मुद्दे पर आज नगर निगम की सामान्य सभा में तीखी बहस हुई। जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से पूछा कि आखिर घनी आबादी के बीच मौत का यह सामान किसकी इजाजत से जमा किया गया था।

    निगम के पास नहीं है गोदामों की सूची: पार्षदों ने बताया 'दुर्भाग्यपूर्ण'

    बैठक के दौरान नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद ने पूरी घटना की उच्च स्तरीय जांच की मांग की। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या जिला प्रशासन या नगर निगम ने वहां पटाखा भंडारण के लिए लाइसेंस दिया था? यदि नहीं, तो इतने वर्षों से यह अवैध कारोबार किसके संरक्षण में फल-फूल रहा था।

    वहीं, पार्षद आलोक दुबे ने जब नगर निगम से शहर में संचालित अन्य पटाखा गोदामों की जानकारी मांगी, तो निगम आयुक्त ने स्पष्ट किया कि उनके पास ऐसी कोई सूची उपलब्ध नहीं है। इस जवाब को पार्षदों ने बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और शहर की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ बताया। उन्होंने कहा कि क्या प्रशासन किसी और बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?

    सुरक्षा संसाधनों की खुली पोल: पार्षद राहुल त्रिपाठी ने उठाए सवाल

    वार्ड पार्षद राहुल त्रिपाठी ने निगम की फायर फाइटिंग व्यवस्था पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा:

    • सिस्टम की विफलता: "हादसे ने साफ कर दिया है कि अगर शहर की किसी ऊंची इमारत (चौथी मंजिल या ऊपर) में आग लगती है, तो निगम के पास उसे बुझाने के लिए कोई आधुनिक संसाधन नहीं हैं।"

    • प्रभावितों की दुर्दशा: आग के कारण आसपास के कई घर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। लोग अपने घर छोड़कर दूसरों के यहाँ शरण लेने को मजबूर हैं। पार्षदों ने मांग की कि प्रभावित परिवारों को तत्काल मुआवजा और राहत प्रदान की जाए।

    15 दिनों में आएगी जांच रिपोर्ट: अधिकारियों पर भी गिरेगी गाज

    विपक्ष और सत्ता पक्ष के भारी दबाव के बाद नगर निगम सभापति हरविंदर सिंह टिन्नी ने इस मामले में एक विशेष जांच कमेटी गठित करने की घोषणा की।

    1. संयुक्त टीम: इस कमेटी में पक्ष और विपक्ष दोनों के पार्षदों को शामिल किया गया है।

    2. समय सीमा: टीम को 15 दिनों के भीतर शहर के सभी अवैध पटाखा और गैस (LPG) गोदामों की जांच कर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी।

    3. कड़ी कार्यवाही: सभापति ने स्पष्ट किया कि यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की मिलीभगत पाई जाती है, जिसके कारण ये अवैध गोदाम चल रहे थे, तो उनके खिलाफ दंडात्मक कार्यवाही की जाएगी।

    शहर में डर का माहौल

    इस अग्निकांड के बाद अंबिकापुर के नागरिक डरे हुए हैं। रिहायशी इलाकों में चल रहे गोदामों को शहर से बाहर शिफ्ट करने की मांग जोर पकड़ रही है। अब देखना होगा कि 15 दिनों बाद आने वाली रिपोर्ट केवल कागजों तक सीमित रहती है या वाकई शहर को इन 'बारूद के ढेरों' से मुक्ति मिलती है।

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