नई दिल्ली: देशभर में इस समय लोग सूरज की तपिश और भीषण गर्मी से त्रस्त हैं और हर कोई बड़ी ही बेसब्री से आसमान की तरफ टकटकी लगाए मॉनसून का इंतजार कर रहा है। चिलचिलाती धूप और लू के इस सितम के बीच मौसम विभाग (IMD) ने एक बहुत ही राहत भरी खबर दी है। ताजा अनुमान के मुताबिक, इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून अपने तय समय से पहले ही भारत में दस्तक देने जा रहा है। सबसे पहले इसकी एंट्री देश के दक्षिणी राज्य केरल में होगी, जिसके बाद यह धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए मध्य और उत्तर भारत के राज्यों को अपनी आगोश में ले लेगा, जिससे लोगों को इस जानलेवा गर्मी से बड़ी राहत मिलेगी।
केरल में समय से पहले दस्तक की उम्मीद
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आमतौर पर केरल में मॉनसून 1 जून के आसपास पहुंचता है, लेकिन इस बार स्थितियां अनुकूल होने के कारण यह 26 मई के आसपास ही केरल के तटों से टकरा सकता है। यानी इस बार वर्षा ऋतु अपने सामान्य समय से करीब 5 से 6 दिन पहले ही आ रही है, हालांकि मौसम विभाग ने इसमें चार दिन आगे-पीछे होने की गुंजाइश भी रखी है। अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और दक्षिण बंगाल की खाड़ी में मॉनसून की गतिविधियां पहले ही शुरू हो चुकी हैं, जो अब अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के रास्तों से होते हुए पहले कर्नाटक, गोवा और महाराष्ट्र के तटीय इलाकों को भिगोएंगी और फिर जून के दूसरे हफ्ते तक मध्य भारत का रुख करेंगी।
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में इस दिन होगी एंट्री
मध्य प्रदेश के निवासियों को मॉनसून की फुहारों के लिए 12 से 15 जून तक का इंतजार करना पड़ सकता है। राज्य के दक्षिणी जिलों जैसे बालाघाट, मंडला और छिंदवाड़ा में सबसे पहले बदरा बरसेंगे, जबकि भोपाल, इंदौर और ग्वालियर जैसे बड़े शहरों तक पहुंचने में बादलों को थोड़ा और समय लगेगा। अच्छी बात यह है कि इस बार मध्य भारत में सामान्य से बेहतर बारिश की उम्मीद जताई गई है। वहीं पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ में भी मॉनसून 10 से 15 जून के बीच प्रवेश करेगा, जिससे रायपुर, दुर्ग और बस्तर संभाग के लोगों को वर्तमान में चल रही भीषण लू से निजात मिलेगी।
उत्तर प्रदेश और दिल्ली को करना होगा थोड़ा और इंतजार
उत्तर भारत के विशाल मैदानी इलाकों, खासकर उत्तर प्रदेश और देश की राजधानी दिल्ली को मॉनसून के लिए थोड़ा लंबा इंतजार करना पड़ेगा। पूर्वी उत्तर प्रदेश में 18 से 20 जून के बीच पहली बारिश होने की संभावना है, जबकि राजधानी लखनऊ, कानपुर और पश्चिमी यूपी के हिस्सों में जून के आखिरी हफ्ते तक ही बादल ठीक से बरसेंगे। दिल्ली और उसके आसपास के एनसीआर (NCR) क्षेत्रों में भी जून के अंत में ही मॉनसून के पूरी तरह सक्रिय होने की बात कही गई है।
कैसी रहेगी बादलों की चाल
मौसम विशेषज्ञों ने एक जरूरी बात साफ की है कि केरल में मॉनसून के जल्दी आने का यह कतई मतलब नहीं है कि देश के बाकी हिस्सों में भी यह तेजी से पहुंच जाएगा। बादलों की यह रफ्तार कई तरह की स्थानीय और वैश्विक मौसमी परिस्थितियों पर निर्भर करती है। वैज्ञानिक इस बार 'एल नीनो' जैसे बड़े कारकों पर भी पैनी नजर रख रहे हैं, क्योंकि इसी के आधार पर यह तय होगा कि देश के किस हिस्से में कितनी मात्रा में पानी बरसेगा। फिलहाल, देश के करोड़ों लोगों को उम्मीद है कि बादलों की यह टोली जल्द ही उन्हें इस तपन से मुक्ति दिलाएगी।


