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    40 मिनट की दूरी कम करने का सपना टूटा, हाईवे फोरलेन नहीं बनेगा

    अलवर। अलवर-बहरोड़ स्टेट हाईवे-14 को फोरलेन (4-Lane) में बदलने का इंतजार कर रही जनता को बड़ा झटका लगा है। राजस्थान सरकार ने भारी-भरकम बजट के कारण इस मेगा प्रोजेक्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। हालांकि, इस खस्ताहाल मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों को राहत देने के लिए सरकार ने इसकी विशेष मरम्मत के लिए 53 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत किया है। राजस्थान राज्य सड़क विकास एवं निर्माण निगम (आरएसआरडीसी) इस मानसून यानी जुलाई महीने से सड़क सुधार का काम शुरू करने की तैयारी में है।


    483 करोड़ का था प्लान, बजट की कमी के चलते टला प्रोजेक्ट

    आरएसआरडीसी ने करीब 8 महीने की कड़ी मशक्कत के बाद इस 70 किलोमीटर लंबे हाईवे को फोरलेन बनाने की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की थी। इस प्रोजेक्ट की कुल लागत 483 करोड़ रुपए आंकी गई थी, जिसके तहत जमीन अधिग्रहण और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई भी होनी थी। जब यह फाइल मंजूरी के लिए सरकार के पास पहुंची, तो भारी लागत को देखते हुए शासन ने इसमें कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई और फिलहाल इस योजना को किनारे कर दिया गया।

    क्यों बेहद जरूरी था इस हाईवे का फोरलेन बनना?

    स्थानीय जनता और आर्थिक विकास के लिहाज से इस मार्ग का चौड़ीकरण बेहद अहम माना जा रहा था, जिसके पीछे मुख्य वजहें निम्नलिखित हैं:

    • समय की बचत: वर्तमान में टू-लेन (2-Lane) होने और भारी जाम के कारण 70 किमी का यह सफर तय करने में करीब 2 घंटे लगते हैं। फोरलेन बनने से यह दूरी महज 1 घंटे से सवा घंटे में पूरी हो जाती।

    • औद्योगिक व पर्यटन को रफ्तार: यह मार्ग नीमराणा, भिवाड़ी और खैरथल जैसे बड़े औद्योगिक क्षेत्रों को जोड़ता है। साथ ही खाटूश्यामजी जाने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए भी यह एक मुख्य रूट है।

    • सड़क हादसों पर लगाम: जिंदौली घाटी सहित इस मार्ग पर कई खतरनाक और संकरे मोड़ हैं, जहाँ अक्सर दुर्घटनाएं होती हैं। सड़क चौड़ी होने से हादसों का ग्राफ काफी नीचे आता।

    अधिकारियों का बयान: जल्द जारी होंगे टेंडर

    आरएसआरडीसी (RSRDC) के परियोजना निदेशक सतीश कुमार ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि फोरलेन बनाने का प्रस्ताव काफी समय पहले ही सरकार को भेजा जा चुका था। सरकार की ओर से अभी इस मार्ग के जीर्णोद्धार और मरम्मत के लिए 53 करोड़ रुपए की राशि मंजूर की गई है। विभाग इस राशि से सड़क को गड्ढामुक्त और सुगम बनाने के लिए जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है।

    उम्मीदों पर फिरा पानी, जनता में मायूसी

    सरकार के इस फैसले से अलवर और बहरोड़ के उन लाखों लोगों में निराशा है, जो लंबे समय से इस मार्ग के कायाकल्प की उम्मीद लगाए बैठे थे। लोगों का कहना है कि पैचवर्क और मरम्मत से कुछ समय के लिए तो राहत मिल सकती है, लेकिन भारी वाहनों के लगातार बढ़ते दबाव और दिल्ली-जयपुर नेशनल हाईवे से सीधी कनेक्टिविटी को देखते हुए इस मार्ग को फोरलेन करना ही एकमात्र स्थाई समाधान है।

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