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    SIR में अपमान का मुद्दा गरमाया, Mamata Banerjee ने जनता से मांगा जवाब

    दीदी के बयान से चुनावी पारा चढ़ा 

    कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एसआईआर प्रक्रिया में चुनाव आयोग द्वारा जो गड़बड़ियां की जा रही हैं। उससे पश्चिम बंगाल में भारी नाराजी देखने को मिल रहीहै। चुनाव प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। उसके बाद भी एसआईआर की कार्रवाई पूरी नहीं हुई है। मतदाता सूची अभी भी तैयार हो रही है। लाखों वोटर के नाम मतदाता सूची में नहीं जोड़े गए हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी प्रत्येक जनसभा में जनता से आह्वान कर रही हैं। एसआईआर के माध्यम से जो अपमान चुनाव आयोग द्वारा मतदाताओं का किया जा रहा है। ममता दीदी ने कहा इसका बदला लिया जाना चाहिए। वोट के जरिए मतदाता अपने अपमान का बदला ले। 
     ममता दीदी लगातार चुनावी रैली को संबोधित कर रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और कांग्रेस के साथ भारतीय जनता पार्टी का गुप्त समझौता है। 

    संविधान के चित्रकार के पोते और पत्नी का नाम कटा 
    पश्चिम बंगाल में फिर में संविधान की चित्रकार नंदलाल बोस के पोते सुप्रभद्र सेन जिनकी उम्र 88 वर्ष है तथा उनकी पत्नी का नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है उनका नाम अभी भी पेंडिंग सूची में डाल कर रखा गया है जिसके कारण वह अपने मतदान के अधिकार से वंचित हो जाएंगे सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश में उन्हें टर्मिनल में जाने का सुझाव दिया गया है इसी तरह से कांग्रेस की उम्मीदवार अरशद अली का नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया है। 
    ममता बनर्जी और टीएमसी का कहना है चुनाव को प्रभावित करने के लिए चुन चुन कर टीएमसी के वोटो का नाम मतदाता सूची से गायब किया गया है सुप्रीम कोर्ट द्वारा कोई अंतिम तारीख तय नहीं की गई है इस बीच में चुनाव चल रहे हैं जिन मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में नहीं जुड़ेंगे वह मतदान नहीं कर पाएंगे चुनाव के बाद यदि उनके नाम जुड़ भी गए तो इसका सीधा नुकसान टीएमसी को होने जा रहा है जिसके कारण पश्चिम बंगाल का चुनावी पारा बहुत बढ़ा हुआ है लाखों मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से बाहर हो जाने के कारण जगह पर भारी विरोध होने की संभावना जताई जा रही है जिसके कारण कानून व्यवस्था की स्थिति को बनाए रखना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती साबित होगी
    विपक्षी दलों के 196 सांसदों ने चुनाव आयोग के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव प्रस्तुत किया था इसे संसद के दोनों सदनों ने खारिज कर दिया है जिसके कारण सियासी पारा दिन प्रतिदिन चढ़ता जा रहा है। 
     

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