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    शून्य मुद्रा को करने का तरीका है बेहद सरल, तनाव से मिलती है राहत

    भागदौड़ भरी जिंदगी में शरीर और मन को निरोगी रखने के लिए योग में कई तरह की मुद्राओं का वर्णन मिलता है, जिनमें 'शून्य मुद्रा' बेहद प्रभावशाली और चमत्कारी मानी गई है। इस मुद्रा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे किसी भी उम्र का व्यक्ति, कहीं भी और कभी भी बेहद आसानी से बैठकर कर सकता है। इसे करने के लिए सबसे पहले सुखासन या पद्मासन में आराम से बैठ जाएं। अपने दोनों हाथों को घुटनों पर रखें और हथेलियां आसमान की तरफ खुली रहें। अब अपने हाथ की मध्यमा (बीच वाली उंगली) को मोड़कर अंगूठे के जड़ (नीचे के हिस्से) में लगाएं और अंगूठे से उसे हल्का सा दबाएं। इस दौरान बाकी की तीनों उंगलियां बिल्कुल सीधी रहनी चाहिए। इस अवस्था में आंखें बंद कर सामान्य सांसें लें और मन को एकाग्र करें।

    कानों की सेहत और श्रवण क्षमता में सुधार

    योग विशेषज्ञों के अनुसार, शून्य मुद्रा का सबसे सीधा और जादुई असर हमारे कानों पर पड़ता है। यह मुद्रा शरीर के भीतर 'आकाश तत्व' को संतुलित करती है, जिससे शरीर में ऊर्जा का प्रवाह सही तरीके से होने लगता है। नियमित रूप से इसका अभ्यास करने से कानों की कई सामान्य और गंभीर समस्याओं में राहत मिलती है। उदाहरण के लिए, कानों में लगातार साय-साय या घंटी बजने की आवाज आना (जिसे टिनिटस कहा जाता है), कान का दर्द और कम सुनाई देने जैसी हल्की-फुल्की दिक्कतों में यह मुद्रा बेहद असरदार साबित होती है।

    गले की मांसपेशियों को आराम और आवाज में स्पष्टता

    यह मुद्रा उन लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है जिनका काम लगातार बोलने का होता है, जैसे- शिक्षक, वक्ता, एंकर या गायक। शून्य मुद्रा को करते समय जब शरीर और मस्तिष्क गहरे विश्राम की स्थिति में जाते हैं, तो इससे गले की मांसपेशियों का तनाव पूरी तरह खत्म हो जाता है। योग प्रशिक्षकों का मानना है कि इसके नियमित अभ्यास से वोकल कॉर्ड (स्वर तंत्र) मजबूत होता है, जिससे आवाज साफ, सुरीली और गंभीर बनती है तथा बोलने या गाना गाते समय शब्दों में अधिक स्पष्टता आती है।

    मानसिक शांति, बेहतर रक्त संचार और फेफड़ों की मजबूती

    आज के दौर में तनाव, एंग्जायटी और मानसिक थकान एक आम समस्या बन चुकी है। जब आप प्रतिदिन कुछ मिनट शून्य मुद्रा में बैठते हैं, तो आपका ध्यान बाहरी दुनिया से हटकर अंतरात्मा पर केंद्रित होता है, जिससे मानसिक अशांति दूर होती है। इसके अलावा, इस मुद्रा के दौरान गहरी और शांत सांसें लेने से शरीर में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ता है और रक्त संचार (ब्लड सर्कुलेशन) में सुधार होता है। यह बढ़ा हुआ ऑक्सीजन का स्तर फेफड़ों की कार्यक्षमता को मजबूत करता है, जिससे सांस से जुड़ी समस्याओं में आराम मिलता है और समग्र स्वास्थ्य बेहतर होता है।

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