मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में आज कमजोरी के रुख के बीच टाटा कैपिटल के शेयरों में गिरावट का दौर देखा गया। दिग्गज घरेलू ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने टाटा कैपिटल के शेयरों पर अपनी कवरेज की शुरुआत की है। ब्रोकरेज हाउस ने इस शेयर को 'न्यूट्रल' रेटिंग देते हुए इसके लिए 364 रुपये का टारगेट प्राइस (लक्ष्य मूल्य) तय किया है। न्यूट्रल रेटिंग और बाजार के सुस्त सेंटिमेंट के कारण आज बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर टाटा कैपिटल का शेयर इंट्रा-डे कारोबार के दौरान करीब 2.86 प्रतिशत की गोताखोरी करते हुए 352.95 रुपये के निचले स्तर तक चला गया था। हालांकि, कारोबार के अंत में यह थोड़ी रिकवरी दिखाते हुए लगभग 1.67 फीसदी की गिरावट के साथ 357.30 रुपये के स्तर पर बंद हुआ। उल्लेखनीय है कि टाटा कैपिटल के शेयरों की लिस्टिंग पिछले साल 13 अक्टूबर 2025 को हुई थी, जब कंपनी ने 15,512 करोड़ रुपये के विशाल आईपीओ के तहत 326 रुपये के भाव पर अपने शेयर जारी किए थे।
शानदार फ्रेंचाइजी और मजबूत पैरेंटेज का मिलेगा लाभ, लेकिन वैल्यूएशन में सब कुछ शामिल
मोतीलाल ओसवाल ने अपनी शोध रिपोर्ट में टाटा कैपिटल की साख की काफी सराहना की है। ब्रोकरेज का मानना है कि टाटा ग्रुप के मजबूत पैरेंटेज (मूल कंपनी का सहारा) और एएए (AAA) क्रेडिट रेटिंग के कारण कंपनी की लायबिलिटी फ्रेंचाइजी बेहद मजबूत है, जिससे इसे बाजार से बेहद सही और किफायती दरों पर फंडिंग मिल जाती है। कंपनी का लोन पोर्टफोलियो भी काफी संतुलित है, जिसमें 98 प्रतिशत खातों का टिकट साइज 1 करोड़ रुपये से कम है और किसी भी एक प्रोडक्ट की कुल लोन बुक में हिस्सेदारी 20 प्रतिशत से अधिक नहीं है। हालांकि, ब्रोकरेज ने न्यूट्रल रेटिंग देने के पीछे तर्क दिया है कि कंपनी की ये सभी अच्छी बातें और भावी ग्रोथ की संभावनाएं वर्तमान शेयर की कीमतों (वैल्यूएशन) में पहले से ही शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर भविष्य में कंपनी के रिटर्न ऑन एसेट (RoA) और रिटर्न ऑन इक्विटी (RoE) में लगातार टिकाऊ सुधार होता है और कंपनी ज्यादा मार्जिन वाले रिटेल लेंडिंग बिजनेस का विस्तार करती है, तो आगे चलकर इसकी रेटिंग को अपग्रेड किया जा सकता है।
डिजिटलीकरण से लागत पर नियंत्रण, मार्जिन और क्रेडिट कॉस्ट में सुधार की उम्मीद
कंपनी के वित्तीय अनुमानों को लेकर ब्रोकरेज फर्म काफी सकारात्मक नजर आ रही है। वित्त वर्ष 2023 से 2026 के बीच टाटा कैपिटल का एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) सालाना 29 फीसदी की शानदार रफ्तार (CAGR) से बढ़ा है और उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2026 से 2028 के दौरान भी यह 23 प्रतिशत की मजबूत गति से आगे बढ़ता रहेगा। जैसे-जैसे कंपनी रिटेल और अनसिक्योर्ड लेंडिंग की तरफ कदम बढ़ाएगी, इसके नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) में क्रमिक सुधार देखने को मिलेगा। ब्रोकरेज का अनुमान है कि कंपनी का एनआईएम वित्त वर्ष 2026 के 5.2 प्रतिशत से सुधरकर वित्त वर्ष 2027 में 5.4 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2028 तक 5.5 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच सकता है। इसके अलावा, कंपनी ने नई शाखाएं खोलने और डिजिटल तकनीकों में निवेश के जरिए अपनी परिचालन लागत पर बेहतरीन नियंत्रण स्थापित किया है, जिससे आने वाले समय में कार्यक्षमता और अधिक मजबूत होगी।
टाटा मोटर्स फाइनेंस के मर्जर का असर और भविष्य के संभावित जोखिम
टाटा कैपिटल की भविष्य की राह में कुछ चुनौतियां और जोखिम भी शामिल हैं, जिन पर निवेशकों को नजर रखनी होगी। बाजार में बढ़ते कड़े कॉम्पिटिशन के कारण कंपनी के लोन मार्जिन पर दबाव देखने को मिल सकता है। इसके साथ ही, अनसिक्योर्ड लोन पोर्टफोलियो में अगर उम्मीद से ज्यादा डिफॉल्ट होते हैं, तो कंपनी की क्रेडिट कॉस्ट बढ़ सकती है। गौर करने वाली बात यह है कि वित्त वर्ष 2023-24 में कंपनी की क्रेडिट कॉस्ट 1 फीसदी से कम थी, लेकिन टाटा मोटर्स फाइनेंस लिमिटेड के साथ हुए मर्जर के बाद इसमें थोड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई थी क्योंकि कमर्शियल वाहन फाइनेंस बिजनेस और अनसिक्योर्ड पोर्टफोलियो में कुछ दबाव देखा गया था। हालांकि, मार्च तिमाही में मोटर्स फाइनेंस सेगमेंट दोबारा मुनाफे में लौट आया है और इसके अनसिक्योर्ड सेगमेंट की एसेट क्वालिटी में भी तेजी से रिकवरी हो रही है। मोतीलाल ओसवाल को उम्मीद है कि बेहतर रिस्क मैनेजमेंट के चलते वित्त वर्ष 2027 और 2028 में कंपनी की क्रेडिट कॉस्ट और कम होकर 1.1 प्रतिशत के आरामदायक स्तर पर आ जाएगी।


