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    Homeराज्यछत्तीसगढ़समय पूर्व जन्मे मासूम के जीने की उम्मीद छोड़ चुके थे माता-पिता

    समय पूर्व जन्मे मासूम के जीने की उम्मीद छोड़ चुके थे माता-पिता

    रायपुर : छत्तीसगढ़ के चिकित्सकों ने एक बार फिर सेवा और समर्पण की मिसाल पेश की है।रायगढ़ मेडिकल कालेज के बाल्य एवं शिशु रोग विभाग की नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (NICU) की टीम ने जूटमिल, रायगढ़ निवासी ललित एवं सुगंधी के समयपूर्व जन्मे गंभीर रूप से बीमार नवजात को 50 दिनों के सफल उपचार के बाद स्वस्थ अवस्था में उनके माता-पिता को सौंपा।

    केस की गंभीरता:  

    गर्भावस्था के 33वें सप्ताह में जन्मा यह शिशु मात्र 1.7 किलोग्राम वजन का था। जन्म लेते ही शिशु को गंभीर श्वसन संबंधी समस्या हुई और पहले ही दिन से बार-बार दौरे पड़ने लगे। जांच में फेफड़ों में रक्तस्राव, गंभीर संक्रमण सेप्सिस एवं निमोनिया जैसी जटिलताएं पाई गईं। शिशु की हालत इतनी नाजुक थी कि उसे तुरंत वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया।

    उपचार के दौरान शिशु को कई बार रक्त एवं प्लाज्मा चढ़ाया गया। व्यापक एंटीबायोटिक एवं एंटीफंगल दवाओं से संक्रमण पर काबू पाया गया। स्थिति में सुधार होने पर वेंटिलेटर से हटाकर नॉन-इनवेसिव वेंटिलेशन NIV पर लाया गया। भर्ती के दौरान हुए कोलेस्टेटिक पीलिया का भी सफल उपचार किया गया।

    सेवा भावना की मिसाल:  

    डॉ.एल .के.सोनी ने बताया कि उपचार के दौरान एक समय शिशु की स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि माता-पिता उम्मीद छोड़कर अस्पताल आना बंद कर चुके थे। इसके बावजूद NICU टीम ने हार नहीं मानी और शिशु का उपचार निरंतर जारी रखा। टीम के प्रयासों से शिशु ने धीरे-धीरे दूध लेना शुरू किया, वजन बढ़ा और सामान्य गतिविधियां विकसित हुईं।छुट्टी के समय शिशु पूरी तरह स्थिर था, दौरे-मुक्त ,सामान्य वातावरण में पर्याप्त ऑक्सीजन स्तर बनाए हुए था ।

    NICU टीम का अथक प्रयास:  

    डॉ. लक्ष्मणेश्वर कुमार सोनी ,विभागाध्यक्ष बाल्य एवं शिशु रोग के नेतृत्व में डॉ. गौरव क्लॉडियस सहायक प्राध्यापक , वरिष्ठ रेसिडेंट डॉ. फारूज अहमद, डॉ. पल्लवी एवं समस्त नर्सिंग व पैरामेडिकल स्टाफ ने 23दिन वेंटिलेटर  और 17दिन ऑक्सीजन सपोर्ट में रहे शिशु को पूरे 50 दिनों तक दिन-रात निगरानी कर उपचार किया और एक नन्ही जिंदगी को बचाया ।

    अस्पताल अधीक्षक डॉ. दुर्गा शंकर पटेल ने कहा कि यह सफलता हमारे चिकित्सकों ,नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ के समर्पण का परिणाम है। मरीज की जान बचाना हमारी प्राथमिकता है। कठिन से कठिन केस में भी हम पूरी निष्ठा से उपचार करते हैं। इस उपचार में लगे रक्त, प्लाज्मा और अन्य सुविधाओं का पूरा खर्च अस्पताल प्रबंधन ने वहन किया l वही निजी अस्पतालों में इलाज का खर्च 6-7लाख रुपए आता हैं । जो हमारे यहाँ पूर्णतः निःशुल्क इलाज हुआ।

    इस सफलता पर अधिष्ठाता डॉ. संतोष कुमार ने NICU टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि चिकित्सकों के समर्पण, सतत निगरानी, उत्कृष्ट चिकित्सकीय कौशल एवं उत्कृष्ट टीमवर्क का परिणाम है l जिसने एक नन्हे जीवन को नई शुरुआत दी है l

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