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    कभी भी गिर सकती है छत: मुरैना शिक्षा विभाग के खस्ताहाल कार्यालय में जान जोखिम में डाल रहे कर्मचारी

    मुरैना | जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय परिसर में इन दिनों भारी अव्यवस्था का माहौल है, जहां विभाग की कई महत्वपूर्ण शाखाएं बेहद जर्जर और खस्ताहाल ढांचों में चलाई जा रही हैं। इन दफ्तरों में अपनी सेवाएं दे रहे क्लर्क और अन्य अधीनस्थ कर्मचारी हर दिन एक बड़े डर के साए में अपनी जान जोखिम में डालकर विभागीय कामकाज निपटाने को विवश हैं। कार्यालय की इमारत इस कदर खंडहर हो चुकी है कि उसकी मुख्य दीवारों में चौड़ी दरारें आ चुकी हैं और देखरेख के अभाव में कई जगहों पर झाड़ियों व पेड़ों की जड़ें कंक्रीट को चीरकर बाहर आ गई हैं, जो कभी भी किसी बड़े हादसे का सबब बन सकती हैं।

    खंडहरनुमा किराए की बिल्डिंग में चल रही हैं मुख्य शाखाएं, जान दांव पर

    विभागीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, स्कूल मान्यता शाखा, जनशिकायत निवारण शाखा और पुरानी परीक्षा रिकॉर्ड शाखा सहित शिक्षा विभाग के कई अन्य महत्वपूर्ण दफ्तर एक पुरानी किराए की बिल्डिंग में संचालित किए जा रहे हैं। वर्तमान में इन संवेदनशील शाखाओं में करीब तीस से चालीस कर्मचारी नियमित रूप से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। छत का प्लास्टर टूटने और दीवारों की बदहाली के बावजूद ये कर्मचारी सुबह से शाम तक इसी असुरक्षित वातावरण में सरकारी फाइलों का निपटारा करते हैं, जिससे कर्मचारियों के साथ-साथ वहां अपने कामों से आने वाले आम नागरिकों की सुरक्षा भी दांव पर लगी हुई है।

    अधिकारियों को लगातार पत्राचार, पर वैकल्पिक व्यवस्था देने में प्रशासन नाकाम

    दफ्तर में कार्यरत कर्मचारियों ने दबी जुबान में बताया कि इमारत की इस खतरनाक स्थिति को लेकर वे लंबे समय से चिंतित हैं। इस संबंध में कई बार लिखित आवेदनों और पत्राचार के माध्यम से वरिष्ठ अधिकारियों का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया गया, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के चलते अब तक वैकल्पिक भवन की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई। कर्मचारियों का आरोप है कि मजबूरीवश उन्हें इसी ढहती हुई इमारत में बैठना पड़ रहा है क्योंकि उनके पास काम करने के लिए कोई दूसरा सुरक्षित स्थान उपलब्ध नहीं कराया गया है।

    बारिश के मौसम में बढ़ा ढहने का खतरा, सुरक्षित स्थान पर दफ्तर शिफ्ट करने की मांग

    कर्मचारियों का यह भी दर्द है कि जहां विभाग के आला अफसर अपेक्षाकृत आधुनिक, नए और पूरी तरह सुरक्षित कमरों में बैठते हैं, वहीं निचले स्तर के स्टाफ को इस बदहाल माहौल में धकेल दिया गया है। आगामी मानसून और भारी बारिश के सीजन को देखते हुए कर्मचारियों की धड़कनें और बढ़ गई हैं, क्योंकि सीलन के कारण भवन के गिरने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। स्थानीय नागरिकों और पीड़ित कर्मचारी संगठनों ने जिला प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि किसी अनहोनी या जानमाल के नुकसान का इंतजार करने के बजाय, इस जर्जर इमारत को तुरंत खाली कराया जाए और दफ्तरों को किसी सुरक्षित सरकारी भवन में स्थानांतरित किया जाए।

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