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    नमक से सेमीकंडक्टर तक टाटा समूह का सफर, रतन टाटा ने कैसे बदली उद्योग जगत की तस्वीर?

    मुंबई: देश के जाने-माने दिग्गज उद्योगपति और 'पद्म विभूषण' से सम्मानित रतन टाटा की पुण्यतिथि के अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता समेत देश के कई प्रमुख नेताओं ने उन्हें गहरी श्रद्धांजलि अर्पित की है। तमाम नेताओं ने उनके अमूल्य योगदान को याद करते हुए कहा कि रतन टाटा का पूरा जीवन अटूट परिश्रम, असाधारण विनम्रता, निष्ठावान सेवा और उच्च मानवीय मूल्यों की एक अनूठी मिसाल रहा है। उन्होंने न केवल भारतीय उद्योग जगत को वैश्विक स्तर पर एक नई और मजबूत पहचान दिलाई, बल्कि समाज कल्याण के क्षेत्र में भी ऐतिहासिक योगदान दिया।

    योगी आदित्यनाथ बोले- उद्योग और समाजसेवा को साथ लेकर चले रतन टाटा

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपने संदेश में लिखा, 'भारत के महान उद्योगपति, 'पद्म विभूषण' रतन टाटा की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि। उद्योग, नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व को हमेशा एक साथ लेकर चलने वाला उनका संपूर्ण जीवन परिश्रम, विनम्रता और जनसेवा की एक अनुकरणीय विरासत है।'

    रेखा गुप्ता बोलीं- दुनिया भर में बढ़ाया भारत का गौरव

    दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने रतन टाटा को नमन करते हुए कहा कि अपने दूरदर्शी नेतृत्व, नवीन विचारों और उत्कृष्टता के प्रति अटूट समर्पण के बल पर उन्होंने भारतीय उद्योग जगत को नई ऊंचाइयों तक पहुँचाया है। उन्होंने विश्व पटल पर भारत का मान-सम्मान और गौरव बढ़ाया है। रेखा गुप्ता ने यह भी कहा कि राष्ट्र निर्माण, रोजगार सृजन और समाज कल्याण के क्षेत्र में रतन टाटा का योगदान आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करता रहेगा।

    संजय सरावगी और मनजिंदर सिंह सिरसा ने भी किया याद

    बिहार भाजपा के अध्यक्ष संजय सरावगी ने रतन टाटा को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण, समाजसेवा और उच्च मानवीय मूल्यों के प्रति उनका समर्पण हमेशा हर देशवासी के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा। वहीं, दिल्ली सरकार में मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि रतन टाटा ने भारतीय उद्योग जगत को वैश्विक पहचान दिलाने के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और सामाजिक कल्याण के क्षेत्रों में भी जनहित को हमेशा सर्वोपरि रखा। उन्होंने यह साबित कर दिखाया कि सफलता का वास्तविक अर्थ केवल ऊंचाइयां छूना नहीं होता, बल्कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना भी है।

    उत्तराखंड सरकार में मंत्री गणेश जोशी ने भी रतन टाटा को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण, समाजसेवा और परोपकार के प्रति उनका समर्पण, उनकी सादगी और मानवीय मूल्यों से ओत-प्रोत जीवन सदैव प्रेरणादायक रहेगा। उनके उच्च आदर्श और अमूल्य योगदान निरंतर आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करते रहेंगे।

    रतन नवल टाटा का प्रेरणादायक जीवन सफर

    रतन नवल टाटा का जन्म 28 दिसंबर 1937 को मुंबई में हुआ था। उन्होंने अमेरिका के प्रतिष्ठित कॉर्नेल विश्वविद्यालय से वास्तुकला (आर्किटेक्चर) की उच्च शिक्षा प्राप्त की थी। वर्ष 1962 में उन्होंने टाटा समूह में अपने व्यावसायिक सफर की शुरुआत की। शुरुआत में उन्होंने समूह की अलग-अलग कंपनियों में जमीनी स्तर पर काम करके कारोबार को बेहद करीब से समझा। वर्ष 1991 में जेआरडी टाटा के पद छोड़ने के बाद उन्होंने टाटा समूह की कमान अपने हाथों में ली और दिसंबर 2012 तक इसके अध्यक्ष पद पर सुशोभित रहे। उनके यशस्वी नेतृत्व में समूह ने भारत के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी स्थिति को बेहद मजबूत किया। उन्हें उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए वर्ष 2000 में 'पद्म भूषण' और वर्ष 2008 में देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'पद्म विभूषण' से अलंकृत किया गया था।

    चाय से लेकर स्टील तक, दुनिया की दिग्गज कंपनियों को टाटा समूह से जोड़ा

    रतन टाटा के दूरदर्शी नेतृत्व में टाटा समूह ने अपने व्यापार का दायरा भारत की सीमाओं से बाहर विदेशों तक फैलाया। समूह ने वर्ष 2000 में प्रसिद्ध ब्रिटिश चाय कंपनी टेटली और वर्ष 2007 में विशाल वैश्विक स्टील कंपनी कोरस का ऐतिहासिक अधिग्रहण किया। इसके पश्चात वर्ष 2008 में टाटा मोटर्स ने अमेरिकी वाहन निर्माता कंपनी फोर्ड से दुनिया के जाने-माने लग्जरी कार ब्रांड जगुआर और लैंड रोवर को अपने अधिकार में ले लिया। इन बड़े व्यावसायिक सौदों ने टाटा समूह को वैश्विक व्यापार जगत में एक सिरमौर के रूप में स्थापित कर दिया। उनके कार्यकाल के दौरान समूह का कुल राजस्व और मुनाफा दोनों ही रिकॉर्ड गति से बढ़े तथा कई भारतीय कंपनियां अंतरराष्ट्रीय फलक पर स्थापित हुईं।

    नमक से लेकर कार और सेमीकंडक्टर तक फैला कारोबार

    आज टाटा समूह का विशाल व्यावसायिक साम्राज्य नमक, चाय, स्टील, आधुनिक कारें, सूचना प्रौद्योगिकी, विमानन, आभूषण और वित्तीय सेवाओं जैसे तमाम प्रमुख क्षेत्रों में सफलतापूर्वक फैला हुआ है। समूह की प्रमुख कंपनियों में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), टाटा मोटर्स, टाइटन, एयर इंडिया और जगुआर लैंड रोवर जैसे दिग्गज नाम शामिल हैं। इसके अलावा समूह ने भविष्य की जरूरतों को देखते हुए सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण कदम रखे हैं। टाटा समूह की स्थापना मूल रूप से जमशेदजी टाटा द्वारा 1868 में की गई थी, और रतन टाटा ने इसी महान विरासत को आगे बढ़ाते हुए इसे दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित कारोबारी समूहों में शामिल करने में अपनी अहम भूमिका निभाई।

    व्यापार के साथ-साथ समाजसेवा पर भी रहा विशेष जोर

    रतन टाटा की पहचान केवल एक बेहद सफल और कुशल उद्योगपति तक ही सीमित नहीं थी, बल्कि वे अपनी असीम सादगी, परोपकार और जरूरतमंदों की मदद करने की भावना के लिए पूरी दुनिया में जाने जाते थे। कोविड-19 महामारी के संकटकाल के दौरान उन्होंने 'पीएम केयर्स फंड' में 500 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि दान देने की घोषणा की थी। टाटा समूह से जुड़े परोपकारी ट्रस्ट शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और सामाजिक विकास के विभिन्न क्षेत्रों में निरंतर समर्पित भाव से कार्य कर रहे हैं। रतन टाटा के नेतृत्व ने व्यापारिक सफलता और सामाजिक उत्तरदायित्व को एक साथ सफलतापूर्वक आगे बढ़ाने की एक अनूठी परंपरा को पूरी दुनिया में स्थापित किया है।

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