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    MP में नए SIM कार्ड खरीदने का ट्रेंड बदला, आखिर लोगों के मन में किस बात का डर?

    भोपाल | टेलीकॉम सेक्टर (दूरसंचार क्षेत्र) से एक बेहद दिलचस्प और चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है, जिसके मुताबिक अब नया सिम कार्ड खरीदने का क्रेज लोगों में धीरे-धीरे पूरी तरह खत्म होता जा रहा है। बाजार विश्लेषकों की मानें तो अब उपभोक्ता नया नंबर लेने के बजाय अपने पुराने नंबर को ही संभाल कर रखने में ज्यादा समझदारी समझ रहे हैं। यही कारण है कि कभी सिम कार्ड बेचने वाले जिन वेंडरों और दुकानों पर ग्राहकों की लंबी कतारें लगी रहती थीं, वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ है। अकेले मध्य प्रदेश की बात करें तो मार्च के महीने में करीब 14 लाख उपभोक्ताओं ने नया सिम कार्ड खरीदने के बजाय अपने पुराने नंबर को ही दूसरी कंपनी में पोर्ट (नेटवर्क बदलने) करने के लिए आवेदन किया।

    इन चार बड़े कारणों से नई सिम से कतरा रहे हैं उपभोक्ता

    बदलते दौर में नया सिम कार्ड न खरीदने के पीछे कई महत्वपूर्ण तकनीकी और आर्थिक कारण काम कर रहे हैं:

    महंगे रिचार्ज का बोझ: पिछले कुछ समय से सभी टेलीकॉम कंपनियों ने रिचार्ज प्लान काफी महंगे कर दिए हैं। अब सिम को सिर्फ चालू (एक्टिव) रखने के लिए भी न्यूनतम रिचार्ज कराना अनिवार्य है। पहले लोग एक साथ कई सिम रख लेते थे, लेकिन अब एक से ज्यादा सिम रखना सीधे जेब पर भारी पड़ता है।

    घर-घर वाई-फाई की पहुंच: आजकल शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों में लगभग हर घर तक हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड वाई-फाई की सुविधा पहुंच चुकी है। ऐसे में इंटरनेट इस्तेमाल करने के लिए लोगों को एक्स्ट्रा डेटा सिम कार्ड रखने की जरूरत ही महसूस नहीं होती।

    बैंकिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म से लिंक होना: आज के समय में हर व्यक्ति का मोबाइल नंबर उसके बैंक खाते, आधार, यूपीआई (UPI) और अन्य सरकारी सेवाओं से जुड़ा हुआ है। नया नंबर लेने पर इन सभी जगहों पर उसे अपडेट कराने का एक बड़ा झंझट खड़ा हो जाता है, जिससे लोग बचना चाहते हैं।

    ई-सिम (e-SIM) का बढ़ता चलन: आधुनिक तकनीक के दौर में अब फिजिकल प्लास्टिक सिम का क्रेज कम हो रहा है। खासकर प्रीमियम और महंगे स्मार्टफोन्स में अब इन-बिल्ट ई-सिम को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे पारंपरिक सिम की बिक्री प्रभावित हुई है।

    मध्य प्रदेश में नए ग्राहकों की संख्या में भारी गिरावट

    भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) द्वारा जारी किए गए ताजा आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में नए मोबाइल कनेक्शन लेने वालों के ग्राफ में तेजी से गिरावट दर्ज की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में नए ग्राहकों की संख्या में करीब ढाई लाख की कमी आई है। हालांकि, वर्तमान में प्रदेश के भीतर सक्रिय (एक्टिव) सिम कार्डों की कुल संख्या 8.56 करोड़ बनी हुई है। इससे यह साफ है कि लोग नया नंबर तो नहीं ले रहे, लेकिन कनेक्टिविटी के मामले में कोई समझौता भी नहीं कर रहे हैं।

    सिम पोर्टेबिलिटी (MNP) के मामले में मध्य प्रदेश देश में अव्वल

    ट्राई की रिपोर्ट से एक और दिलचस्प बात निकलकर सामने आई है कि मध्य प्रदेश के उपभोक्ता भले ही अपने मौजूदा नेटवर्क या सर्विस से संतुष्ट न हों, लेकिन वे नया नंबर खरीदने के बजाय 'मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी' (MNP) का सहारा ले रहे हैं। अपनी पसंदीदा कंपनी का नेटवर्क चुनने के लिए पुराने नंबर को ही दूसरी कंपनी में ट्रांसफर कराने के मामले में मध्य प्रदेश इस समय पूरे देश में शीर्ष (टॉप) स्थान पर पहुंच गया है। उपभोक्ता बिना अपना नंबर बदले केवल ऑपरेटर बदलकर अपनी समस्याओं का समाधान तलाश रहे हैं।

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