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    आज सोने की कीमतों में बड़ा इजाफा नहीं, मिले ये दाम

    व्यापार: फेस्टिव सीजन में आगर आप भी सोने-चांदी की ज्वैलरी खरीदने या निवेश करने की प्लानिंग कर रहे हैं तो आपके लिए राहत की खबर है. अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने और बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी की वजह से गुरुवार को सोने की कीमतों में लगातार दूसरे दिन गिरावट देखने को मिली. निवेशकों के लिए यह राहत भरी खबर है, क्योंकि हाल के दिनों में सोने की कीमतें काफी ऊंचाई पर पहुंच गई थीं.

    सोने के दामों में गिरावट का कारण क्या है?
    अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मजबूती और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों ने सोने की कीमतों को नीचे खींचा है. साथ ही, बॉन्ड यील्ड में आई तेजी ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर मोड़ा है, जिससे सोने की मांग थोड़ी कमजोर पड़ी है. भारत में भी इसका सीधा असर देखने को मिला है.

    भारत के बड़े शहरों में सोने के ताजा दाम (25 सितंबर 2025)
    देश के प्रमुख शहरों में 22 कैरेट और 24 कैरेट सोने की कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई है. मुंबई, दिल्ली, चेन्नई और बेंगलुरु जैसे शहरों में आज सोना पहले से सस्ता मिल रहा है.

    MCX पर सोना-चांदी की चाल
    देश के वायदा बाजार यानी एमसीएक्स (MCX) पर भी सोने के दाम में गिरावट दर्ज की गई. शुरुआती कारोबार में सोना 0.32% की गिरावट के साथ ₹1,12,200 प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा था. वहीं, चांदी में हल्की तेजी देखने को मिली और इसका दाम 0.22% बढ़कर ₹1,34,090 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया.

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की चाल
    दुनिया भर में सोने की कीमतें भी थोड़ी कमजोर नजर आ रही हैं. 25 सितंबर को सुबह 0347 GMT तक अमेरिकी हाजिर सोना $3,737.01 प्रति औंस पर था. वहीं, दिसंबर डिलीवरी के लिए अमेरिकी सोना वायदा लगभग स्थिर यानी $3,767.90 पर रहा. डॉलर इंडेक्स में 0.1% की हल्की गिरावट ने विदेशी निवेशकों के लिए सोना थोड़ा सस्ता जरूर किया है, लेकिन अब निवेशकों की निगाहें शुक्रवार को आने वाली PCE रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो अमेरिका में महंगाई का प्रमुख संकेतक है.

    भारत में सोने की कीमतें कैसे तय होती हैं?
    भारत में सोने की कीमतें कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारकों से प्रभावित होती हैं. इनमें अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतें, आयात शुल्क, करेंसी एक्सचेंज रेट, टैक्स और सरकार की नीतियां शामिल हैं. इसके अलावा, भारत में सोना एक सांस्कृतिक प्रतीक भी है, जो खास तौर पर शादी-ब्याह और त्योहारों में इस्तेमाल होता है, इसलिए मांग बढ़ने पर कीमतें भी चढ़ जाती हैं.

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