भोपाल: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में आयोजित कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हो गई है। बैठक की शुरुआत में कैबिनेट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नॉर्वे और स्वीडन की सरकारों द्वारा दिए गए सर्वोच्च नागरिक सम्मान के लिए बधाई प्रस्ताव पारित किया। इसके साथ ही, बैठक में बताया गया कि भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन हॉल में आयोजित 'इंडो-फ्रांस कॉन्क्लेव' बेहद सफल रही, जिसमें कई बड़ी वैश्विक कंपनियों ने मध्य प्रदेश में भारी निवेश करने की इच्छा जताई है। इसके अलावा, हाल ही में निगम और मंडलों में नियुक्त हुए सभी नए पदाधिकारियों के सफल प्रशिक्षण कार्यक्रम की जानकारी भी कैबिनेट में साझा की गई, जिसमें उन्हें कार्यप्रणाली की बारीकियों से अवगत कराया गया।
धार भोजशाला में बनेगा 'सरस्वती लोक', वाग्देवी की मूर्ति लाने के प्रयास तेज
कैबिनेट बैठक के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने धार की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर आए अदालती फैसले का स्वागत किया। उन्होंने एक बड़ा संकल्प दोहराते हुए कहा:
"लंदन में मौजूद मां वाग्देवी की मूल प्रतिमा को वापस भारत लाने के लिए राज्य सरकार, केंद्र सरकार के माध्यम से हर संभव कूटनीतिक प्रयास करेगी। इसके साथ ही, धार में भव्य 'सरस्वती लोक' के निर्माण की कार्ययोजना पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है।"
तबादला नीति को हरी झंडी: 1 से 15 जून तक खुलेंगे ट्रांसफर
मध्य प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए मोहन कैबिनेट ने एक बेहद राहत भरा फैसला लिया है। नई ट्रांसफर पॉलिसी को कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है, जिसके तहत राज्य में 1 जून से लेकर 15 जून 2026 तक तबादलों पर से प्रतिबंध हटा लिया जाएगा। इस सीमित अवधि के दौरान पारदर्शी और ऑनलाइन व्यवस्था के जरिए ही ट्रांसफर किए जाएंगे, जिससे लंबे समय से फेरबदल का इंतजार कर रहे कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलेगी। इसके अतिरिक्त, राज्य में विकास की गति को बनाए रखने के लिए 30 हजार करोड़ रुपये के निरंतरता वाले विकास कार्यों को भी प्रशासनिक स्वीकृति दी गई।
अमित शाह की जगदलपुर बैठक का हुआ उल्लेख
मंत्रिपरिषद की बैठक में मुख्यमंत्री के हालिया छत्तीसगढ़ दौरे का भी विशेष जिक्र किया गया। मंत्रियों को बताया गया कि सीएम डॉ. मोहन यादव पिछले दो दिनों के प्रवास पर जगदलपुर (बस्तर) गए थे, जहाँ केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल मीटिंग हुई थी। इस बैठक के मुख्य एजेंडे को रेखांकित करते हुए बताया गया कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर अब उन इलाकों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विशेष नीतियां और इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाएं तैयार कर रही हैं, जो कभी धुर नक्सल प्रभावित क्षेत्र माने जाते थे।


