नई दिल्ली। देश में नवनिर्मित राजमार्गों और एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के तुरंत बाद सड़क धंसने, गड्ढे होने और जलभराव जैसी सामने आ रही समस्याओं पर भारत सरकार ने बड़ा कदम उठाने की तैयारी की है। नए बुनियादी ढांचा ढाँचे की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सरकार अब औपचारिक उद्घाटन से पहले 2 से 3 महीने का अनिवार्य 'ट्रायल रन' या 'रोड टेस्ट' लागू करने की योजना बना रही है। इस परीक्षण अवधि के दौरान वाहनों से किसी भी प्रकार का टोल टैक्स नहीं वसूला जाएगा, ताकि निर्माण संबंधी खामियों को पहले ही चिह्नित कर उन्हें ठीक किया जा सके।
उद्घाटन से पहले परखी जाएगी सड़कों की गुणवत्ता
हाल ही में लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे और देहरादून एक्सप्रेसवे जैसे बड़े राष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स में शुरूआती दिनों में ही कई गंभीर खामियां देखने को मिली थीं। सरकार का मानना है कि निर्माण दोषों के बावजूद जनता से टोल वसूलना अनुचित है। नए नियमों के तहत 2-3 महीने के ट्रायल रन के दौरान यदि सड़क धंसती है या ड्रेनेज जैसी कोई समस्या आती है, तो ठेकेदारों (कॉन्ट्रैक्टर्स) और कंसल्टेंट्स को अपने खर्च पर उन खामियों को दूर करना होगा।
मानसून और भारी यातायात में परीक्षण की योजना
एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, लंबे समय तक ट्रायल रन चलाने से खासकर मानसून के मौसम में जमीन धंसने, पहियों के निशान बनने और जलभराव जैसी कमियों का सटीक आंकलन हो सकेगा। जब तक कोई हाईवे या एक्सप्रेसवे इस परीक्षण में पूरी तरह खरा नहीं उतरता और उसका औपचारिक उद्घाटन नहीं हो जाता, तब तक उस खंड (स्ट्रेच) पर यात्रियों से टोल नहीं लिया जाएगा।
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली सस्पेंड
सरकार ने इस नई नीति को लागू करते हुए लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर टोल टैक्स की वसूली को पूरी तरह से निलंबित कर दिया है। बारिश के दौरान सड़क के बार-बार धंसने और निर्माण कार्य में गड़बड़ियों के सामने आने के बाद यह सख्त निर्णय लिया गया है। अब इस कॉरिडोर पर निर्माण कार्य पूरी तरह ठीक होने और गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरने के बाद ही दोबारा टोल वसूली शुरू की जाएगी।


